Wednesday, August 5, 2020

Quran ki maloomat hindi कुरआन की दिलचस्प मालुमात


स.  कुरआन शरीफ क्या है ?
ज.   पूरी दुनिया और  दुनिया की तमाम लोगों की हिदायत के लिए अल्लाह ताआला  का वो कलाम जो आसमानों पर से जिब्रइल अ.स.के जरिए मुहम्मद (स. अ. व.) पर नाजिल किया गया  उस कलाम को कुरआन शरीफ कहते हैं
स.  कुरआन शरीफ के और क्या क्या नाम है?
ज.   कुरआन शरीफ के सिफाती नाम तो बहुत है मगर उसके हकीकी नाम पांच है (1) कुरआन (2)अल फुरकान  (3)अझ झिक्र  (4)अल किताब (5) अत तंजील  इनमें सबसे ज्यादा मशहूर    कुरआन है
स.  कुरआन शरीफ में कितनी मर्तबा कुरआन के नाम से याद किया गया है? 
ज. 61 जगह पर कुरआन को कुरआन के लफ्ज से याद किया गया है
स. कुरआन का मतलब क्या है
ज. कुरआन अरबी जबान का लफ्ज है जिसका मतलब है पड़ी हुई किताब  जिसको पडा जाता हो
स. कुरआन शरीफ आसमान से किस तरह उतारागया है? 
ज. कुरआन शरीफ अल्लाह ताआला के पास लोहे महफूज में मौजूद है वहासे दो मर्तबा उतारा गया है  पहली मर्तबा लोहे महफूज से पहले आसमान पर पूरा कुरआन एक साथ शबे कद्र में उतारा गया. दूसरी मर्तबा जब आप स. अ. व. की  उम्र मुबारक 40 साल हुई तब से शुरू होकर 23 साल 5 महीने में थोड़ा-थोड़ा करके पूरा कुरआन उतारा गया.
स.  कुरआन शरीफ में कितने पारे हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में 30 पारे हैं
स.  कुरआन शरीफ में कितनी सूरते हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में 114 सुरते हैं
स.  कुरआन शरीफ में मक्की सूरते और मदनी सूरते कितनी हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में 28 मदनी सूरते और 86 मक्की सूरते हैं
स.  मक्की सूरत का क्या मतलब होता है? 
ज. जो आयत या सूरत हिजरत से पहले नाजिल हुई है  इसको मक्की कहा जाता है 
स.  मदनी सूरत का क्या मतलब होता है? 
ज.  जो आयत या सूरत हिजरत के बाद नाजिल हुई है  इसको मदनी सूरत कहा जाता है
स.  कुरआन शरीफ में कितने रुकुअ हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में 558 रुकुअ हैं
स.  कुरआन शरीफ में कुल कितनी आयात है? 
ज.  कुरआन शरीफ में कुल 6236 आयात है
स.  कुरआन शरीफ में कितनी सजदह की आयतें हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में 14 सजदह की आयतें हैं
स.  कुरआन शरीफ में सबसे बड़ी सूरत कौन सी है? 
ज.  कुरान शरीफ में सबसे बड़ी सूरत सुरऐ बकराह है जिसमें 40 रुकुअ और 286 आयात हैं 
स.  कुरआन शरीफ में सबसे छोटी  सूरत कौन सी है ? 
ज.  कुरआन शरीफ में सबसे छोटी सूरत सूरऐ कौसर हैं जिसमें  फक्त  तीन आयतें हैं
स.   कौन सी सूरत सबसे पहले नाजिल हुई? 
ज.   सुरये अलक 30 वे पारे की 96 नमबर की सुरत नाझील हुइ
स.  सूरह फातिहा को फातिहा क्यों कहते हैं? 
ज.  फातिहा का मतलब होता है शुरू करने वाली  चुके यह सूरत कुरआन के शुरू में है इसलिए उसे सूरह फातिहा कहते हैं
स.  आयत किसको कहते हैं? 
ज.  आयत का मतलब है निशानी और  कुरआन की एक एक आयत समझने वालों के लिए हक की निशानी है इसलिए उसे आयत  कहते हैं
स.  कुरआन के बारे में क्या अकीदा होना चाहिए? 
ज.  जो कुछ कुरआन में है वह सब हक और सच है और जो कुरआन के खिलाफ है वह सब बातिल है
स.  कुरआन शरीफ में अल्लाह का जाति नाम अल्लाह कितनी मर्तबा आया है? 
ज.  कुरआन शरीफ में अल्लाह तआला का जाती नाम अल्लाह  2584  मर्तबा आया है
स.  ऐसी कौन सी सूरत है जिसकी हर आयत में अल्लाह लफ्ज़ आया है? 
ज.  28 वे पारे में  सूरऐ  मुजादलह  ऐसी सूरत है के जिसमें 22 आयतें हैं और उसकी हर आयत में एक एक दो दो मर्तबा अल्लाह लफ्ज़ आया है  पूरी सूरत की 22 आयत में कुल 40 मर्तबा अल्लाह  लफ्ज आया है
स.   कुरआन शरीफ में आप स. अ. व. का  जाति नाम मुहम्मद  कितनी मर्तबा आया है?
ज.  कुरआन शरीफ में 4 मर्तबा मुहम्मद नाम आया है
स.  कुरआन शरीफ में मुहम्मद   नाम के अलावा दूसरे नामों से कितनी मर्तबा जिक्र हुआ है? 
ज.  216 मर्तबा मोहम्मद के अलावा दूसरे नामों से जिक्र हुआ है
स.  कुरआन शरीफ में कितनी नबीयों का जिक्र हुआ है? 
ज.   कुरआन शरीफ में 25 नबीयों का नाम आया है
स.   कुरआन शरीफ में कितने परिंदों का जिक्र हुआ है? 
ज.  कुरआन शरीफ में 6 परिंदों का जिक्र हुआ है
स.  कुरआन शरीफ में कितनी मस्जिदों का जिक्र हुआ है? 
ज.  कुरआन शरीफ में 5  मस्जिदों का जिक्र हुआ है (1) मस्जिदे हराम(2)  मस्जिदे नबवी(3)  मस्जिदे कुबा(4) मस्जिदे अक्सा(5) मस्जिदे  जीरार( मुनाफिकून की बनाई हुई मस्जिद) 
स.  कुरआन शरीफ में जन्नत के  किन  नामों का जिक्र हुआ है? 
ज.  कुरआन शरीफ में जन्नत के सात नामों का जिक्र हुआ है (1) जन्नते  अदन(2)  जन्नतुन्नइम(3)  जन्नतुल फिरदौस(4) जन्नतुल मअवा(5) दारुस्सलाम(6) दारुल करार(7) जन्नते इल्लीयीन
स.  कुरआन शरीफ में  जहन्नम के किन नामों का जिक्र है?
ज.   कुरआन शरीफ में जहन्नम के 7 नामों का जिक्र है(1) जहन्नम (2) लजा (3) हुलमह (4)  सइर (5) सकर  (6) जहीम (7)हावीया
स. कुरआन  शरीफ में कितने फरिश्तों का नाम के साथ  जिक्र है? 
ज. कुरआन शरीफ में 12 फरिश्तों का नाम के साथ  जिक्र है (1) जिब्राइल अ.स.(2) मिकाइल अ.स.(3) मालिक अ.स(4) हारुत अ.स (5) मारूत अ.स (6)रअद  अ.स. (7)बरक अ.स. (8)सीजल अ.स. (9)कइद अ.स. (10)झुलकरनैन  अ.स. (11)अस्सकीना अ.स.  (12)कीरामन कातीबीन अ.स. 
स.  कुरआन शरीफ में कितने सहाबा का नाम के साथ जिक्र है? 
ज.   कुरआन शरीफ में सिर्फ एक सहाबी का नाम के साथ  जिक्र है  हजरत जैद बीन हारीसा र. का 22 वे पारेमे सुरऐ अहजाब मे  जिक्र है 
स.  उर्दू जुबान में सबसे पहले  कुरान की तफसीर कीस्ने लिखी? 
ज.  उर्दू जुबान में सबसे पहले कुरान की तफसीर  शाह अब्दुल कादिर साहब देहलवी र. अ. ने सं हीजरी 1245 मे लीखी
स.  कुरआन शरीफ मैं एक ऐसा  निकाह  का बयान है जो आसमान पर खुद अल्लाह तआला ने  करवाएं  वह कौन सा निकाह है ?
ज.  वह हजरत मुहम्मद स. अ. व. का हजरत झैनब र.अ. के साथ निकाह हे जो आस्मान पर अल्लाह ने खुद करवाये. 
स.  कुरआन शरीफ में कौन सी सूरत के शुरू में बिस्मिल्लाह नहीं है? 
ज.दसवे पारेमे सुरऐ तौबा के शुरु मे  बिस्मिल्लाह नहीं है
स.  कुरआन शरीफ में नमाज का जिक्र  कितनी मर्तबा आया है? 
ज. कुरआन शरीफ में नमाज का जिक्र 700 मर्तबा आया है
स. कुरआन शरीफ का दिल कोनसी सूरत को कहते हैं? 
ज. सूरऐ यासीन को  कुरआन शरीफ का दिल कहते हैं
स.  कौन सी सूरत को दुल्हन कहा जाता है
ज.  सूरऐ रहमान को  दुल्हन कहां जाता है जो 27 वे पारे मे 55 वी सुरत है
स.   मुअव्वझतैन कौन सी सुरत को कहते हैं? 
ज. मुअव्वझतैन 113/114 वी सुरत यानी सुरऐ फलक और सुरऐ नास को कहते हैं 
स.  हजरत उमर र.अ. कौनसी सुरत सुनकर इमान लाये? 
ज.  हजरत उमर र. अ. सुरऐ ताहा की शुरु की आयते सुनकर इमान लाये. 
स.  कुरआन शरीफ आधा कहां पर होता है? 
ज.  कुरआन शरीफ के  15 वे  पारे मे सुरऐ कहफ की आयत नमबर 19 मे वलयतलत्तफ पर आधा कुरआन  होता है 
स.  कुरआन शरीफ में कतनी औरतों का नाम आया है? 
ज.   कुरआन शरीफ में सिर्फ एक औरत हजरत  मरियम अ.स. का नाम आया हैं 
स.  कुरआन शरीफ में सबसे लंबी आयत कौन सी है ? 
ज.   कुरआन शरीफ में सबसे लंबी आयत  सूरह बकरह की  आयत नंबर 282 है जिसमें 540 हर्फ  है 
स.   कुरआन शरीफ में कितनी  सुरतेंं नबीयों के नाम पर हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में 6 सुरतें नबीयुं के नाम पर है (1) सूरऐ यूसुफ(2) सूरऐ हुद(3)सुरऐ युनुस(4)सुरऐ इब्राहिम (5)सुरऐ नुह(6) सुरऐ मुहम्मद स.अ.
स. कुरआन शरीफ में मरतबे मे कोनसी आयत सबसे बडी हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में आयतुल कुर्सी  मरतबे में सबसे बडी हैं 
स.  कुरआन शरीफ में सबसे ज्यादा उम्मीद दिलाने वाली आयते कौन सी है? 
ज.  कुरआन शरीफ में 24 वे पारे की सूरह जुमर की आयत नमबर 53 सबसे ज्यादा उम्मीद दिलाने वाली आयत हैं 
स.  कुरआन शरीफ में सबसे ज्यादा डराने वाली आयत को नसी हैं ? 
ज.  कुरआन शरीफ में सबसे ज्यादा डराने वाली आयत सूरह बकरा की 278 वी आयत है
स.  जन्नती लोगों को सबसे ज्यादा खुशी किस आयत में हैं? 
ज.  जन्नती लोगों को सबसे ज्यादा खुशी सुरऐ युनुस की आयत नंबर 26 में हैं
स.  जहन्नमी लोगों के लिए सबसे खतरनाक आयत कौन सी है? 
ज.  जहन्नमी लोगों के लिए सबसे खतरनाक आयत सुरऐ नबा की आयत नम्बर 30। हैं। 

स. कुरआन शरीफ में मंझीलें कीतनी हैं? 
ज. कुरआन शरीफ में मंझीलें 7 हैं 
स. कुरआन शरीफ में सुरऐ सजदह में यवमुल फतह कीस दीन को कहा गया है? 
ज. कुरआन शरीफ में सुरऐ सजदह में  यवमुल फतह कयामत के दीन को कहा गया हैं।
स।. कुरआन शरीफ में कुल कितने हर्फ हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में कुल  323671 हर्फ हैं 

Tuesday, August 4, 2020

सेब खाने के फायदे जो आप पढ़ कर हैरान रह जाओगे

सेब के फायदे के बारे में बात करें तो  सेब पोषक तत्वों से भरपुर भंडार माना जाता है। सेब सामान्य से लेकर गंभीर शारीरिक समस्याओं का इलाज करने कीह ताकत रखता है। सेब आपको खुन की कमी, डायबिटीज , हृदय रोग, दमा और  कैंसर जैसी बडी बीमारी से बचाने का काम कर सकता हैं। सिर्फ बिमारी ही नहीं, बल्कि खूबसूरत त्वचा और खूबसूरत बालों के लिए भी सेब खाना बहुत फायदे हैं। 
     तो  चलिए जानते हैं रोज़ाना एक सेब खाने से हमे क्या क्या फायदे मिलते हैं 
      दोस्तों एनीमिया ऐसा रोग हे जीस्मे लीवर कमजोर पडनेसे शरीर मे खुन बन्ना बंद होजाता है जीस्से खुन की  कमी होजाती है तो खुन की कमी को दुर करने के लिए सेब बेहतरीन उपाय हैं रोजाना ऐक सेब खाकर उपर से एक ग्लास दुध पीये यातो सेब का ज्यूस बनाकर एक महीने तक पीया जाये तो खुन की कमी दुर होजायेगी क्योंकि सेब मे भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता हैं। 
      जीन लोगुंकी हड्डियां कमजोर है हाथ पैरों में दर्द रहता हो कमर में दर्द रहता हो या  बच्चों के हाथ पैर कमजोर हो तो सेब का सेवन बहुत ही फायदेमंद है क्योंकि सेब मे काफी मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है 
      
     सेब में एंटीऑक्सीडेंट्स पाया जाता हैं, जो त्वचा से जुड़ी समस्या को दूर करता हैं अगर आप के चेहरे पर काले दाग धब्बे मुहासे है या चेहरा पीला दीखता है तो रोजाना सुबह एक सेब जरूर खाये जीस्से त्वचा से दाग धब्बे दुर हो कर त्वचा चमकदार जवान दीखेगी

   सेब मे एन्टी बैक्टेरियल होनेकी वजासे इम्यूनिटी यानी बीमारियों लेडनेकी ताकत बढाकर धातक बीमारियों से बचाता है क्योंकि सेब में कई तरह के विटामिन मिनरल मौजूद होते है जो बीमारियों से बचाता है 
     दोस्तों सेब के और कइ फायदे है जैसा कि ह्रदय को ताकत देता है हार्ड अटैक से बचाता है कोलेस्ट्राल लेवल को कंट्रोल में रखता है शरीर के वजन को बढने नही देता दीमाग को ताकत देकर याद शक्ति को बढाता है लीवर को ताकत देता है कीडनी की पथरी होने से बचाता है आंखों की रोशनी को बढाता है 
   तो दोस्तो रोजाना एक सेब खाया जाये तो हम कइ सारी बीमारियों से बचे रहेंगे और शरीर स्वस्थ जवान बना रहेगा

Sunday, July 19, 2020

कुर्बानी के दिनों में कुर्बानी से बढ़कर कोई अमल नहीं

कुर्बानी के दिनों में कुर्बानी से बढ़कर कोई अमल नहीं

     नबी सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया कुर्बानी के दिन में कोई अमल अल्लाह ताला को खून बहाने से ज्यादा पसंदीदा नहीं है और यह कुर्बानी का जानवर कयामत के मैदान में अपने सिंघो बालों और खुरों के साथ आएगा, और कुर्बानी में बहाया जाने वाला खून जमीन पर गिरने से पहले अल्लाह ताला के दरबार में क़बूलियत का मकाम हासिल कर लेता है इसलिए खुश दिल्ली से कुर्बानी किया करो. 

कुर्बानी के बजाये सदका काफी नहीं

 यह बात जान ले के कुर्बानी के दिनों में जानवर का ज़बह करना ही ज़रूरी है, जानवर की कीमत के सदका करने से काम नहीं चल सकता है, और जो शख्स मालदार होने के बावजूद कुर्बानी नहीं करेगा वह सख्त गुनहगार होगा क्योंकि वह वाजिब को छोड़ने वाला है.

आजकल कुछ *मॉडर्न सोच* वाले लोग कुर्बानी के बजाय सदका करने पर ज़ोर देते हैं तो उनकी यह बात शरीयत के बिलकुल खिलाफ है.

कुर्बानी किस पर वाजिब है?

 जिस पर सदक़ए फित्र वाजिब है उस पर बकरा ईद के दिनों में कुर्बानी करना भी वाजिब है, और अगर इतना माल ना हो कि जिस पर सदक़ए फ़ितर  वाजिब होता हो तो उस पर कुर्बानी वाजिब नहीं है लेकिन फिर भी अगर कर दे तो सवाब है.

बीवी बच्चों की तरफ से कुर्बानी?

 कुर्बानी सिर्फ अपनी तरफ से करना वाजिब है औलाद की तरफ से वाजिब नहीं, बल्कि अगर नाबालिग औलाद मालदार भी हो तब भी उसकी तरफ से करना वाजिब नहीं है, ना अपने माल में से ना उसके माल में से, क्योंकि उस पर कुर्बानी वाजिब ही नहीं होती. लेकिन अगर बाप अपने माल में से अपनी नाबालिग औलाद की तरफ से कुर्बानी कर दे तो मुस्तहब / अच्छा है .

बीवी और बालिग औलाद मालदार हो तो उनको अपनी तरफ से कुर्बानी करना वाजिब है.

 कुर्बानी के 3 दिन हैं यानी 10/ 11/ और 12/ जि़लहिज्जा, इससे पहले या बाद में कुर्बानी मोतबर नहीं है .

कौन से दिन कुर्बानी अफज़ल/ बेहतर है?

 10 ज़िलहिज्जा को कुर्बानी करना सबसे अफज़ल है ,उसके बाद 11/और 12 ज़िलहिज्जा का दर्जा है .

रात में कुर्बानी करना ?

 कुर्बानी के दिनों में रात में कुर्बानी करना मकरु है इसलिए रात में कुर्बानी ना करें और अगर रात में कुर्बानी करें और अगर रात में कुर्बानी करे तो रोशनी वगैरह का अच्छा इंतजाम रखे, ऐसा ना हो कि अंधेरे की वजह से ज़बह में कमी रह जाए.

कुर्बानी के वक्त में शहर और गांव का फर्क

 कुर्बानी का असल वक्त 10/ ज़िलहिज्जा की सुबह सादिक से शुरू होकर 12/ ज़िलहिज्जा के सूरज डूबने तक रहता है,

 जिस बड़ी आबादी में ईद की नमाज होती है वहां ईद की नमाज के बाद ही कुर्बानी दुरुस्त होगी और जहां ईद की नमाज जाइज़ ना हो जैसे छोटे गांव और देहात तो वहां सुबह सादिक के फ़ौरन बाद से कुर्बानी दुरुस्त है.

 ईद की नमाज के बाद ख़ुत्बा  से पहले कुर्बानी

 अगर ईद की नमाज के बाद ख़ुत्बा से पहले कुर्बानी की तो दुरुस्त हो जाएगी लेकिन ऐसा करना अच्छा नहीं है, बेहतर यह है कि ख़ुत्बा के बाद ही कुर्बानी की जाए.

इमाम ने बगैर वजू ईद की नमाज पढ़ा दी तो नमाज और कुर्बानी का क्या हुकुम है?

अगर इमाम ने भूल से बगैर वजू ईद की नमाज पढ़ा दी फिर ईदगाह में मजमा बिखर जाने के बाद उसे याद आया तो दोबारा ईद की नमाज का हुकुम नहीं है; लेकिन अगर मजमा बिखरने से पहले याद आ गया तो ईद की नमाज दोहराई जाएगी,

और अगर कोई शख्स ऐसी सूरत में नमाज दोहराने से पहले कुर्बानी कर दे तो उसकी कुर्बानी दुरुस्त मानी जाएगी.

ईदगाह की नमाज के बाद कुर्बानी

अगर ईदगाह में ईद की नमाज अदा कर ली गई हो और मेहल्लों की मस्जिदों में 
 ईद की नमाज में देर हो तो भी कुर्बानी करना दुरुस्त है.



 कुर्बानी के सही होने के लिए शहर में किसी भी जगह ईद की नमाज़ होना काफी है

 अगर शहर में किसी जगह ईद की नमाज़ पढ़ ली जाए तो पूरे शहर वालों के लिए कुर्बानी करना दुरुस्त हो जाता है इसमें ईदगाह या जामा मस्जिद वगैरह की नमाज़ का होना ज़रूरी नहीं है-

 जिस शहर में कुर्बानी की जाए वहीं की ईद की नमाज़ का ऐतबार है

अगर किसी शख्स ने दूसरे शहर में कुर्बानी का इंतज़ाम किया हो तो उसी शहर में नमाजे ईद के बाद कुर्बानी दुरुस्त होगी (मान लीजिए अगर मालिक के शहर में ईद की नमाज ना हुई हो तो उसका इंतजार नहीं किया जाएगा)


वो रगे जिन का काटना ज़रूरी है

जानवर के गले मे चार रगे होती हैँ। 
1) हुलक़ूम (सांस की रग )
2) मर्री (खाने पीने की रग )
3-4) दोषा रगे (खून की नालिया )
इन चारो रगो मे से किसी भी तीन का काटना ज़रूरी है, 
गुध्धी (गर्दन )की तरफ से काटना मकरु है। 

अगर गर्दन अलग हो गई

अगर ज़िबाह करते वक़्त गर्दन अलग हो गई,तो क़ुर्बानी दुरुस्त है,  मगर मकरु होगी (एहतियात से ज़िबाह करें )

तस्मियां (बिस्मिल्लाह, अल्लाहु अकबर )पढ़ना

ज़िबाह करते वक़्त बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर पढ़ना ज़रूरी है, अगर भूल जाये,तो कोई बात नहीं, 
अगर जानबूझ कर बिस्मिल्लाह छोड़ दिया तो जानवर हराम है, 
बाज़ दफा एक या दो रग कटने पर ही क़साईं छुरी ले लेता है, तो उस वक़्त क़साईं पर भी तसमियां ज़रूरी है,ज़िबाह मे मदद करने वालो पर भी बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर पढ़ना ज़रूरी है, 
ज़िबाह करने मे छुरी पकड़ कर जो मदद कर रहा उस पर भी बिस्मिल्लाह पढ़ना ज़रूरी है.


 कम कीमत की वजह से दूसरी जगह कुर्बानी

सस्ती कीमत की वजह से दूसरी जगह कुर्बानी कराने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन यह बात याद रहे कि माली इबादत में जितना ज्यादा रुपया खर्च किया जाता है सवाब उतना ही ज्यादा मिलता है -

 दिखावे के लिए महंगा जानवर खरीदना

आज कल  कुछ लोग सिर्फ नाम वरी और दिखावे के लिए ज्यादा कीमत का जानवर खरीदते हैं और फिर उसका खूब चर्चा करके खुश होते हैं तो इस दिखावे के साथ सवाब की उम्मीद रखना सिर्फ धोखा है अल्लाह ताला के नजदीक वही अमल मकबूल है जो सिर्फ अल्लाह को राजी करने के लिए किया जाए दिखावे का जानवर कितना ही कीमती हो अल्लाह की नजर में उसकी कोई कीमत नहीं -  


अगर जानवर के पेट से बच्चा निकला?

अगर जानवर के पेट से ज़िंदा बच्चा निकला तो उसको भी ज़िबह कर दें, 
अगर मरा हुआ बच्चा निकला तो वो बच्चा हलाल नहीं उसको दफन कर दें। 

मकरूहात

जानवर के सामने या जानवर को गिराने के बाद छुरी वगैरह तेज़ करना मकरू है,(छुरी पहले ही तेज़ कर लें, )
क़ुर्बानी के जानवर पर सवारी करना मकरू है, 
जानवर ज़िबह करने के बाद जानवर के ठंडा होने से पहले मुंडी फोड़ना या खाल उतारना मकरू है, (ठंडा होने के बाद ये काम करें )
क़ुर्बानी का जानवर किराए पर देना मकरू है, 
क़ुर्बानी के जानवर का बाल और दूध निकालना मकरू है (अगर बाल या दूध निकाल लिया है तो सदक़ा करना ज़रूरी है)

क़ुर्बानी करने वाला एक ज़िल हिजजा से क़ुर्बानी तक बाल वगैरह ना काटे

जिसकी तरफ से क़ुर्बानी होने वाली है उसके लिए मुस्तहब ये है, के ज़िल हिजजा का महीना शुरू होने के बाद से क़ुर्बानी तक बदन के बाल और नाख़ून वगैरह ना काटे (ये अमल मुस्तहब है )
(मुस्लिम शरीफ किताब उल अज़हिया )

मुफ़्ती मुहम्मद फैज़ान क़ासमी रामपुरी


 मालदार की कुर्बानी का जानवर गुम हो गया

  जिस शख्स पर कुर्बानी वाजिब हो और उसने जो जानवर कुर्बानी की निय्यत से रखा हो वह कुर्बानी से पहले गुम हो जाए तो उस पर उसकी जगह दूसरे जानवर की कुर्बानी जरूरी होगी -

 मालदार की कुर्बानी का जानवर मर गया

    मालदार शख्स ने कुर्बानी के लिए जो जानवर तय किया था अगर वह कुर्बानी से पहले मर जाए तो उस पर दूसरे जानवर की कुरबानी जरूरी होगी -

 मालदार का कुर्बानी के जानवर को बदलना

      मालदार शख्स को इख्तियार है कि वह अपना तय क्या हुआ जानवर कुर्बानी से पहले बदल ले और उसकी जगह दूसरे जानवर की कुर्बानी करे; कियोंकी मालदार शख्स के तय करने से पहले कुर्बानी का जानवर तय नहीं होता इसलिए उसे बदलने का इख्तियार रहता है-                                                                   

क़ुर्बानी के जानवर की खाल

क़ुर्बानी के जानवर की खाल सदक़ा की जा सकती है, और अगर खाल को ऐसे ही इस्तेमाल मे लाया जा रहा है,तो जाइज़ है, जैसे जानमाज़ बनाना वगैरह, 
अलबत्ता अगर खाल को बेच दिया है,तो अब उसकी क़ीमत को इस्तेमाल मे लाना जाइज़ नहीं है,बल्कि क़ीमत सदक़ा कर दें, 
और खाल के अलावा दूसरे अंग जैसे: हड्डी खाल वगैरह को बेचना जाइज़ नहीं, अगर किसी ने बेच दिया तो उसकी क़ीमत सदक़ा करना ज़रूरी है
इसी तरह जान की खाल वगैरह को मज़दूरी के तोर पर क़साइ को देना दुरुस्त नहीं है,अगर दे दिया तो इतनी क़ीमत सदक़ा करना ज़रूरी है (अगर उजरत के अलावा दे,तो कोई हर्ज नहीं )

हलाल जानवर के वो सात आज़ा जिनका खाना जाइज़ नहीं

1) मुजककर जानवर की शर्म गाह
2) मॉन्नस जानवर की शर्म गाह 
3) मुज़ककर जानवर का खुसया 4) मसाना
 5) गदूद
 6) हराम मगज़ जो रीड़ की हड्डी मे रहता है,  
7) पित्ता (वो थैली जो जानवर की कलेजी से लगी रहती है )
दमे मसफूह (रगो मे बहने वाला पतला खून )बिलकुल हराम और नापाक है, 
हलाल जानवर की ओजड़ी खाना बिला कराहत जाइज़ है, 


 ग़रीब शख्स की कुर्बानी का जानवर गुम हो गया

अगर ऐसे शख्स ने जिस पर कुर्बानी वाजिब ना थी कोई जानवर कुर्बानी की नियत से खरीद लिया था फिर वह कुर्बानी से पहले गुम हो गया तो उस पर दूसरे जानवर की कुर्बानी जरूरी नहीं है,

 ग़रीब शख्स की कुर्बानी का जानवर मर गया

गरीब शक्स ने कुर्बानी के लिए जानवर खरीदा था या मन्नत के तौर पर तय किया था फिर वह कुर्बानी से पहले मर गया तो उस पर दूसरे जानवर की कुरबानी जरूरी नहीं है-

 ग़रीब का कुर्बानी के जानवर को बदलना

गरीब शख्स ने अगर जानवर कुर्बानी के लिए जुबान से कहकर तय कर लिया हो तो अब उसके लिए बदलने की इजाजत नहीं बल्कि उसी तय किए हुए जानवर की कुर्बानी जरूरी है-                                                                  

ज़िबह करने का मस्नून तरीक़ा

अपने जानवर को खुद अपने हाथो से ज़िबह करें,अगर अपने हाथ से नहीं कर सकता है,तो दूसरे से ज़िबह कराने मे कोई हर्ज नहीं,मगर बहतर ये है के ज़िबह के वक़्त खुद वहां मौजूद रहे। 
पहले छुरी खूब अच्छी तरह तेज़ करले। 
जानवर को क़िब्ला रुख इस तरह लिटाए, के उसके चारो पैर और हलक़ क़िब्ला रुख हों,और ज़िबह करने वाला गर्दन के पास इस तरह खड़ा हो के उसका रुख भी क़िब्ले की तरफ हो जाए। 
क़ुर्बानी की नियत सिर्फ दिल से करना काफ़ी है,ज़बान से नियत के अल्फाज़ कहना ज़रूरी नहीं,अलबत्ता ज़िबह करते वक़्त ज़बान से बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर कहना ज़रूरी है۔

 फिर ये दुआ पढ़ें....

إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ حَنِيفًا ۖ وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ، إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ 
الْعَالَمِينَ".
 और ज़िबह करने से पहले  ये दुआ पढ़े...

"اللّٰهُم َّمِنْكَ وَ لَكَ"’’بسم اللہ اللہ اکبر‘‘

और ज़िबह करने के बाद ये दुआ पढ़े

"اَللّٰهُمَّ تَقَبَّلْهُ مِنِّيْ كَمَا تَقَبَّلْتَ مِنْ حَبِيْبِكَ مُحَمَّدٍ وَ خَلِيْلِكَ إبْرَاهِيْمَ عليهما السلام".

अगर किसी और की तरफ से ज़िबह कर रहा हो तो "مِنِّيْ" की जगह " مِنْ " के बाद उस शख्स का नाम ले..  

क़ुर्बानी के बदले क़ुर्बानी की रक़म सदक़ा खैरात नहीं कर सकते

क़ुर्बानी के तीन दिनों मे जानवर की क़ुर्बानी ना करके इतनी रक़म गरीबो, मिसकीनो या किसी और ज़रूरत की जगह देने से ये वाज़िब अदा नहीं होगा, बल्कि हमेशा गुनहगार रहेगा। कुछ लोग कहते हैँ, के हर साल क़ुर्बानी मे इतनी रक़म सारे मुस्लमान खर्च करते हैँ, वही रक़म से ना जाने कितने गरीबो की शादीयां हो सकती हैँ, और कितने गरीबो के  रोज़गार का इन्तिज़ाम किया जा सकता है, या फसाद ज़दा इलाको मे क़ुर्बानी की रक़म से इमदाद की जा सकती है, 
ऐसी बात दीने इस्लाम से ना वाक़िफ़ और इस्लाम से बेज़ार लोग ही कह सकते हैँ,  उनसे कोई पूछे ये तमाम काम तुम्हारे क़ुर्बानी करने से रुके हुए हैँ क्या? ये बात अच्छी तरह याद रखो के नमाज़ एक अलग इबादत है, रोज़ा एक अलग इबादत है, नमाज़ से रोज़े का फ़र्ज़ अदा नहीं होगा, और रोज़े से नमाज़ का फ़र्ज़ अदा नहीं होगा, इसी तरह सदक़ा खैरात एक अलग इबादत है, और क़ुर्बानी एक अलग इबादत है, क़ुर्बानी की इबादत सदक़ा खैरात से अदा नहीं होगी, बल्कि क़ुर्बानी के अमल से hi अदा होगी,, इसी पर नबी करीम (स अ व )और तमाम सहाबा और ताबाईन का तअमुल है। 


 जानवर गुम होने के बाद मिल गया

अगर गुमशुदा जानवर बाद में मिल जाए तो उसकी कई सूरते हैं:

(१) अगर मालदार का गुमशुदा जानवर मिला है तो उस पर खास उसी जानवर की कुरबानी जरूरी नहीं है बल्कि किसी भी एक जानवर की कुरबानी कर सकता है -

(२) गरीब शख्स का गुमशुदा जानवर मिल गया और उसने अभी कोई और जानवर कुर्बानी की नियत से नहीं खरीदा था तो उस पर सिर्फ हासिल सुधा यानी मिले हुए जानवर की कुर्बानी करना ज़रूरी है-

(३) और अगर गुमशुदा के मिलने से पहले गरीब कोई और जानवर कुर्बानी के लिए खरीद चुका था बाद में गुमशुदा भी मिल गया तो अब उस पर नए खरीदे हुए और हासिल शुदा यानी गुम होने के बाद मिले हुए दोनों जानवरों की कुर्बानी ज़रूरी होगी -                                                

 मरहूम की तरफ से कुर्बानी

 अगर कोई शख्स अपने मरहूम रिश्तेदारों की तरफ से नकली कुर्बानी करें तो इसमें कोई हर्ज नहीं है और यह तरीका उम्मत में बगैर किसी इखतिलाफ के जारी है और इस तरह की कुर्बानी का गोश्त कोई भी खा सकता है इसमें फकीर या ग़रीब का होना ज़रूरी नहीं है,

 हुजूर की तरफ से कुर्बानी

अगर कोई शख्स अपनी तरफ से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जानिब से कुर्बानी करे तो इसमें कोई हर्ज नहीं बल्कि ये खुश नसीबी के हासिल करने का जरिया है
 

कुर्बानी की कज़ा

 अगर वक़्त पर कुर्बानी ना की जा सकी हो और जानवर पहले से मौजूद हो तो  वक़्त गुज़रने के बाद उसी जानवर को ज़िंदा सदका करना ज़रूरी है, 

कुर्बानी के दिनों के बाद पूरे जानवर ही की कीमत का सदका

अगर किसी शख्स पर कुर्बानी वाजिब थी लेकिन उसने कुर्बानी के दिनों में ना तो कुर्बानी की और ना जानवर खरीदा तो बाद में उस पर एक बकरे की कीमत का गरीबों पर सदका करना वाजिब है (यानी अब बड़े जानवर के सातवें हिस्से की कीमत काफी ना होगी बल्कि पूरे जानवर ही की कीमत देनी ज़रूरी होगी -

कई वर्षों से वाजिब कुर्बानी नहीं की

 अगर मालदार शख्स ने मालदार होने के बावजूद कुर्बानी छोड़ दी और कई साल तक कुर्बानी नहीं की तो हर साल की कुर्बानी के बदले में एक बकरा या बकरी की कीमत का सदका करना ज़रूरी है 

कौन कौन से जानवरों की कुर्बानी जाइज़ है?

  कुर्बानी क्योंकि एक खास इबादत का नाम है इसलिए हर हलाल जानवर की कुर्बानी जाइज़ नहीं बल्कि उसके लिए कुछ खास जानवर फिक्स हैं सिर्फ उन्हीं की कुर्बानी जाइज़ है, और वह जानवर यह हैं:

 *(१) ऊंट* *(२) ऊंटनी*

 *(३) गाय* *(४) बैल* 

*(५) भैंस* *(६) भैंसा*

 *(७) बकरा* *(८) बकरी*

 *(९) दुंबा* *(१०) मेंढा-*


कुर्बानी के जानवरों की उम्र

▪ऊंट, ऊंटनी : कम से कम पांच साल-

▪गाये, बैल , भैंस, भैंसा: कम से कम दो साल-

▪बकरा, बकरी, दुंबा, भेड़, मेंढा: कम से कम एक साल -

 अगर कुर्बानी के जानवरों की उम्र ऊपर बताई गई उम्र से कम हो, भले एक दिन ही सही, तो ऐसे जानवर की कुर्बानी जाइज़ नहीं -

छे (६) महीने का दुंबा, मेंढ़ा और भेड़:

दुंबा, भेड़, और मेंढ़ा अगर साल से कम हो और कम से कम छे महीने या उससे ज़ियादा का हो, लेकिन इतना सेहत मंद और बड़ा हो कि एक साल का मालूम होता हो, और उस में और एक साल की उम्र वाले दुंबों में फरक़ ना हो सके, तो उनकी कुर्बानी तब भी जाइज़ है-

याद रहे कि ये हुक्म बकरी और बकरे के लिए नहीं है - 

जानवरों की उम्रों में इस्लामी साल का ऐतबार:

जानवरों की उम्रों में असल ऐतबार इस्लामी यानी चांद के साल का है,अंग्रेज़ी साल का ऐतबार नहीं,इसलिए चांद के ऐतबार से उम्र पूरी होना ज़रूरी है भले अंग्रेज़ी साल के ऐतबार से उनकी उम्र कम हो - 

अगर किसी जानवर की उम्र कुर्बानी के दिनों में पूरी हो रही हो, तो उम्र पूरी हो जाने के बाद ही उनकी कुर्बानी जाइज़ है -

 इसी तरह अगर किसी जानवर की उम्र कुर्बानी के तीसरे दिन पूरी हो रही हो तो तीसरे दिन ही कुर्बानी जाइज़ होगी, इससे पहले नहीं -


क़ुर्बानी के जानवरों में कम से कम 2 दांत होने की शर‌ई हैसियत:

क़ुर्बानी का जानवर जब क़ुर्बानी की उम्र को पहुंच जाता है तो आम तौर पर उसके दो दांत निकल आते हैं जो इस बात की निशानी हुआ करती है कि जानवर की क़ुर्बानी की उम्र पूरी हो चुकी है -
( क़ुर्बानी के जानवर और उनकी उम्र के लिए *भाग १३ और 14* देखिए)

लेकिन इसमें यह बात याद रहे कि असल एतबार उम्र का है, दांतो का नहीं, अगर किसी जानवर की उम्र पूरी हो चुकी हो लेकिन उसके दो दांत अभी तक नहीं निकले हों तो ऐसे जानवर की क़ुर्बानी भी जायज़ है-

अगर किसी जानवर के दांत पूरे ना हों लेकिन बेचने वाले का केहना है कि उम्र पूरी हो चुकी है भले ही दांत नहीं निकले हैं और जानवर की ज़ाहिरी हालत भी यही बता रही हो कि उम्र पूरी हो चुकी है, तो ऐसी सूरत में बेचने वाले की बात पर भरोसा करना दुरुस्त है, और अगर हो सके तो ऐसी बातों में किसी माहिर आदमी की राय ले ली जाए ताकि शक ना रहे-



कौन से जानवर में कितने लोग शरीक हो सकते हैं?

❇ बड़े जानवर जैसे ऊंट, ऊंटनी, गाय, बैल, भैंस, भैंसा में एक आदमी से लेकर 7 आदमी तक शरीक हो सकते हैं, चाहे दो हों या तीन हों या चार हों या 5/6 हों लेकिन 7 से ज्यादा लोगों का शरीक होना जायज़ नहीं-

❇ छोटे जानवर जैसे बकरा, बकरी, दुंबा, भेड़, मेंढ़ा  में से हर एक में सिर्फ एक आदमी ही की क़ुर्बानी जायज़ है इसमें एक से ज़्यादा का शरीक होना जायज़ नहीं......


मालदार शख़्स के जानवर के बच्चे का हुक्म

मालदार शख़्स ने क़ुर्बानी के लिए जो जानवर मुतअय्यिन किया था, अगर उस जानवर ने क़ुर्बानी से पहले बच्चे को जन्म दे दिया,तो उस बच्चे की क़ुर्बानी,उस शख़्स पर लाज़िम नहीं ! 

 मालदार शख़्स का क़ुर्बानी के जानवर को बदलना

मालदार शख़्स को इख़्तियार है कि जो जानवर उसने क़ुर्बानी के लिए मुतअय्यिन किया है, वह जानवर क़ुर्बानी से पहले बदलना चाहे तो बदल ले और उसकी जगह दूसरे जानवर की क़ुर्बानी करे! क्यूंकि मालदार शख़्स के मुतअय्यिन करने से क़ुर्बानी का जानवर मुतअय्यिन नहीं होता ; इसलिए उसे बदलने का इख़्तियार रहता है ! 


 फ़क़ीर के जानवर के बच्चे का हुक्म-

फ़क़ीर शख़्स ने जो जानवर क़ुर्बानी के लिए मुतअय्यिन कर रखा था,उसने क़ुर्बानी से पहले बच्चे को जन्म दिया,तो ऐसी सूरत में फ़क़ीर पर जानवर और उसके बच्चे दोनों की क़ुर्बानी लाज़िम है ; क्यूंकि ये जानवर फ़क़ीर की तरफ़ से मन्नत के दर्जे में है,और मन्नत के सब फायदे मन्नत ही के हुक्म में होते हैं,और ज़बह करने के बाद उस बच्चे का गोश्त सदक़ा करना लाज़िम है ! खुद इस्तेमाल करना जाइज़ नहीं ! 

 फ़क़ीर का क़ुर्बानी के जानवर को बदलना

फ़क़ीर शख़्स ने अगर जानवर क़ुर्बानी के लिए कह कर ज़बान से मुतअय्यिन कर लिया ; तो अब उसके लिए बदलने की इजाज़त नहीं  बल्कि इसी मुतअय्यिन जानवर की क़ुर्बानी लाज़िम है !



 
गुमशुदा जानवर बाद में मिल गया
अगर गुमशुदा जानवर बाद में मिल जाए तो उसकी कई सूरतें हैं۔

1- अगर मालदार का जानवर मिला है तो उस पर ख़ास इसी जानवर की क़ुर्बानी लाज़िम नहीं है,बल्कि किसी एक जानवर की क़ुर्बानी वाजिब होने के हिसाब से कर सकता है ! 
2- फ़क़ीर का गुमशुदा जानवर मिल गया और उसने अभी कोई और जानवर क़ुर्बानी की नियत से नहीं ख़रीदा था,तो उस पर सिर्फ़ हासिल शुदा जानवर की क़ुर्बानी लाज़िम है ! 
3- और अगर गुमशुदा के मिलने से पहले फ़क़ीर शख़्स कोई और जानवर ख़रीद चुका था,बाद में गुमशुदा भी मिल गया तो अब उस पर नए ख़रीदे हुए और हासिल होने वाले दोनों जानवरों की क़ुर्बानी लाज़िम है ! 

 नाबालिग़ और मजनून की तरफ़ से क़ुर्बानी                                नाबालिग़ बच्चे और मजनून शख़्स पर क़ुर्बानी वाजिब नहीं है, (अगरचे वो मालदार ही क्यूँ ना हों),इसी तरह उनके औलिया पर भी उनकी तरफ़ से क़ुर्बानी लाज़िम नहीं,लेकिन अगर कर दें, तो बहतर है !           



 अहले ख़ाना और औलाद की तरफ़ से बिना इजाज़त क़ुर्बानी
अगर बाप का मामूल है कि वह हर साल अपने अहले ख़ाना और छोटे बड़े बच्चों  की तरफ़ से  क़ुर्बानी करता है तो सब की तरफ़ से क़ुर्बानी दुरुस्त है !चाहे अहले ख़ाना ने बाक़ायदा इजाज़त दी हो या नहीं दी हो ! 

 क़ुर्बानी करने वाला क़ुर्बानी से पहले वफ़ात पा गया
जिस शख़्स पर क़ुर्बानी वाजिब थी और वो क़ुर्बानी के दिनों में ही वफ़ात पा जाये और अभी उसने क़ुर्बानी भी नहीं की थी तो उससे क़ुर्बानी का वुजूब साक़ित हो जाता है,इसलिए उस पर क़ुर्बानी की वसिययत लाज़िम ना होगी ! 

 क़ुर्बानी के दिनों के बाद वफ़ात पाने पर वसियत लाज़िम है
अगर कोई शख़्स क़ुर्बानी के दिनों के गुज़रने के बाद वफ़ात पा जाये तो, उस पर बकरी की क़ीमत का सदक़ा करना या उसकी वसियत करना लाज़िम है !



 मरने वाले शरीक की क़ुर्बानी
अगर बड़े जानवर में हिस्सा लेने वाले किसी शरीक का क़ुर्बानी से पहले इंतिक़ाल हो जाये और उसके वारिसीन सब आक़िल बालिग़ हों और वो सब उसकी तरफ़ से क़ुर्बानी की इजाज़त दें , तो ये क़ुर्बानी दुरुस्त होगी और अगर तमाम वारिसीन या उनमे से कोई एक वारिस इजाज़त ना दें या तमाम वरिसीन या उनमें से कोई एक वारिस नाबालिग़ या ग़ैर आक़िल हो तो ऐसी सूरत में अगर मय्यित का हिस्सा लगा दिया गया  तो उस जानवर में शरीक किसी भी हिस्सेदार की क़ुर्बानी दुरुस्त ना होगी;क्यूंकि मय्यित का हिस्सा क़ुरबत ना रहेगा ! 

 बग़ैर वसियत मय्यित की तरफ़ से क़ुर्बानी
अगर कोई शख़्स अपने मरहूम अज़ीज़ों की तरफ़ से नफ़ली  क़ुर्बानी करे तो इसमें कोई हर्ज नहीं है,और ये सिलसिला उम्मत में बग़ैर किसी इख्तिलाफ के जारी व सारी है !और इस तरह की क़ुर्बानी का गोश्त कोई भी खा  सकता है!इसमें फ़क़ीर या ग़रीब की क़ैद नहीं ! 

 हुज़ूर (स•अ• व• ) की तरफ़ से क़ुर्बानी
अगर कोई शख़्स अपनी तरफ़ से हुज़ूर (स•अ• व• ) की जानिब से क़ुर्बानी करता है,तो इसमें कोई हर्ज नहीं बल्कि ये सआदत के हुसूल का ज़रीआ है 



Tuesday, June 30, 2020

केला खाने के फायदे Kela khane ke fayde Banana benefits



दोस्तों केला बरसात की मौसम  मे हरजगह आसानी से मीलने वाला फल हैं
      केले की गिनती चुनिंदा स्वादिष्ट और गुणकारी फलों में की जाती है केला ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है 
      केले में थायमिन रीबोफ्लावीन नियासिन फोलिक एसिड विटामिन A और विटामिन B काफी मात्रा में पाया जाता है 
       तो चलिए जानते हैं केले खानेके फायदे के बारे में 
     दुबले पतले लोगों को वजन बढ़ाने तथा ताकत के लिए रोजाना सुबह 3 4 केले दुध के साथ लेनेसे वजन बढने के साथ साथ शरीर ताकतवर बनता है। 
     केले  को दही में मिलाकर रोज़ाना खाली पेट खाने से वीर्य गाढ़ा होकर योन शक्ति बढजाती है 
    केला  खाने से हड्डियाँ मजबूत बनती हैं क्यों के केलेमे कैल्शियम और मैग्नीशियम काफी मात्रा में पाया जाता है 
    खाना खाने के बाद रोजाना केला खाया जाये तो खाना आसानी से पचजाता है जीस्से गेस कब्ज की तकलीफ नही होती है क्योंकि केलेमे फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं 
    जीन लोगुंको एनीमिया  यानी शरीर मे खुन की कमी रहती हो उनको केला खाने से खुन की कमी दुर होजाती है क्योंकि केलेमे आयरन पाया जाता है 
      दील और ब्लडप्रेशर के मरीजों के लिए केला बहुत ही फायदेमंद है क्योंकि केलेमे पोटेशियम पाया जाता है जो हार्ट अटैक से बचाता है और ब्लडप्रेशर को कंट्रोल में रखता है। 
     केला खाने से याददाश्त बनी रहती है क्योंकि  केले में विटामिन B6 पाया जाता है जो नीर्वस सिस्टम को ठीक रखता है 

Wednesday, June 10, 2020

मछली हलाल क्यूँ है जबकि वह ज़िबह नहीं की जाती ? Machhli Halal kyun Jabki vo halal nahi ki jati ?

मछली हलाल क्यूँ है जबकि वह ज़िबह नहीं की जाती ?

 विज्ञान ने गैर मुसलमानों के सबसे बड़े सवाल का जवाब दे दिया

       इस्लाम ने हलाल खाने का हुक्म  देते हुए हराम खाने  से मना किया है और ऐसे जानवर का गोश्त का उपयोग करने के लिए हुक्म  दिया है जिसे इस्लामी तरीके से ज़िबह किया गया हो।

      झटके से मारे गए जानवर का गोश्त इस्लाम में हराम है
गैर मुस्लिम  इस्लाम के इस हुक्म के  मुताल्लिक  मछली के बारे मे सवाल करते हैं कि उसे ज़िबह नहीं किया जाता तो यह कैसे हलाल हो गई

      लेकिन अब विज्ञान ने इस सवाल का जवाब दे दिया है और ऐसा आश्चर्यजनक खुलासा किया है! अल्लाह ने दुनिया में मौजूद हर शै को सही तरीके से बनाया है और ऐसा ही मामला मछली के साथ भी है वो  जैसे ही पानी से बाहर आती है तो उसके शरीर में मौजूद सभी रक्त तुरंत अपना रास्ता बदल लेता है और मछली के मुंह में इकठ्ठा होकर " एपीगलोटस" में जमा होना शुरू हो जाता है।

      मछली के पानी से निकलने के कुछ ही देर बाद उसके शरीर में मौजूद रक्त एक एक बूंद एपीगलोटस में जमा हो जाता है और उसका  गोश्त पाक और हलाल रहता है और यही कारण है कि मछली ज़िबह  करने की जरूरत ही पेश नहीं आती  और जिस दौरान मछली का गोश्त बनाया जाता है तो " एपीगलोटस"को बाहर निकाल दिया जाता है।
        यही नहीं विज्ञान ने इस्लाम में हलाल भोजन के हुक्म  के पीछे छिपे तथ्य को भी प्रकट किया है जिससे गैर मुस्लिम भी हक्का-बक्का रह गए हैं क्योंकि जब किसी जानवर को ज़िबह किया जाता है तो उसके दिल और दिमाग का संपर्क समाप्त नहीं होता और दिल जानवर की वाहिकाओं और धमनियों में मौजूद सभी रक्त बाहर निकलने तक धड़कता रहता है और इस तरह उसका गोश्त खून से पाक और हलाल हो जाता है।

        दूसरी ओर जब किसी जानवर को गैर इस्लामी तरीके से  यानी "झटके"  से मार दिया जाता है तो उसका दिल भी तुरंत धड़कन बंद कर देता है और इस प्रकार शरीर से खून निकल ही नहीं पाता। वैज्ञानिकों का मानना है कि विभिन्न प्रकार के गंभीर रोग पैदा करने वाले जरासीमों और बैक्टरियाज़ के  प्रजनन के लिए रक्त बहुत अच्छा माध्यम है और जब जानवर के शरीर से खून निकल ही नहीं पाता तो यह गोश्त ही खराब कर देता है और जब इंसान उसे खाता हैं तो कई बीमारियों से पीड़ित हो जाता हैं।
याद रखिये ज़िबह किये हुए गोश्त की फ्रिज लाइफ झटके के गोश्त से कहीं ज़्यादा होती है। इसीलिए कहा जाता है के इस्लाम 100 परसेंट एक प्राकृतिक तथा वैज्ञानिक धर्म है।

        इस्लाम पूरी दुनिया के लिए सही मज़हब है.क्योंकि वह एक ईश्वर को पूजने का हुक्म देता है.और इस्लाम के  नियम ईश्वर ने ख़ुद बनाए है अपने बंदो के लिए, आज साइंस इस्लाम के हर नियम पर रिसर्च कर रहा है, और संतुष्ट भी हो रहा है,.?

Thursday, May 14, 2020

Happy EidulFitra Eid Mubarak Status images pictures 2020

eidulfitra Mubarak images


    रमजान इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना है। इस्लाम मे  चांद कैलेंडर का उपयोग होता है  यानी हर महीने की शुरुआत नए चांद के देखने से होती है। क्युं की चांद कैलेंडर सुरज कैलेंडर की तुलना में लगभग 11 दिन छोटा होता है, दुनिया भर में 180 करोड से ज्यादा मुसलमान इस महीने में रोजा (उपवास) करते हैं यानी अल्लाह की इबादत के लिए खाने  पीने के साथ साथ दुनिया के बीन जरूरी कामों को छोडदेते हैं   इस रमजान के महीने में मुसलमान पवित्र किताब यानी कुरान को जीयादा पढते हैं और रात को तरावी मे पुरे महीने में पुरे कुरान को पुरा करते हैं 

ईदुल फित्र दीन का त्योहार 

     जब मुसलमान पुरे महीने के रोजे पुरे करते हैं तो रमजान की आखिरी रात को चांद देखकर ईद के दिन का फैसला होता है.तो अल्लाह मुसलमानों को इनाम देते हैं जीसको इदुलफित्र कहते है इदुलफित्र के दीन मुसलमान छोटे छोटे गांव से जाकर शहरों मे जमा होते हैं वहां ईदगाह और बड़ी मस्जिदों में इद की नमाज पढते हैं नमाज के बाद मुसलमान एक-दूसरे की मुलाकात करते हैं     ऐसे में लोग एक-दूसरे के घर ईद पर जाते हैं और एक-दूसरे को ईद की बधाई देते हैं। लेकिन जो लोग दूसरे शहरों में या दोस्तों से दूर रहते हैं, वे भी सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देते हैं। अगर आप भी अपने दोस्तों को ईद की मुबारकबाद भेजना चाहते हैं या whatsapp पर स्टेटस लगाने के लिए इद मुबारक इमेज लगाना चाहते हैं तो आज हम आपको ईद के लिए खास इमेज दिखा रहे हैं, जिन्हें आप अपने whatsapp स्टेटस के लिए डाउनलोड कर सकते हैं।


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चेचन्या जहा सबसे खुबसूरत इलाका खुबसूरत लड़कियां और बहादुर कोम रहती हैं





दोस्तों, आज मैं आपको दुनिया के सबसे खूबसूरत लोग और सबसे खूबसूरत इलाके यानी चेचन्या के बारे में इस पोस्ट में बताने वाला हुं।

     हमने सैकड़ों जिन और परियों की कहानियां सुनी हैं जिनमें कोहे काफ के नाम का जिक्र हमेशा होता है, यानी जिन्नों और परियों का देश। लेकिन दोस्तों, यह जन्नत जैसा टुकड़ा यानी चेचन्या, दुनिया के सबसे खूबसूरत इलाकों में से एक है, जहाँ इसकी सुंदरता के अलावा, इसके निवासियों के अपने नैतिकता और ईमानदारी के नजरिए में इसका अपना उदाहरण है। चेचन्या इस्लामी परंपराओं वाला एक देश है। एक तरह से, चेचन्या को दशकों तक बदकिस्मत कहा जा सकता है आजादी के लिए लड़ने के बावजूद, इस क्षेत्र में अभी भी पूर्ण स्वतंत्रता की कमी है। चेचन्या का पूरा और आधिकारिक नाम चेचन्या गणराज्य है। चेचन्या की जनसंख्या 1436000 है। चेचन्या का क्षेत्रफल 17,300 वर्ग किलोमीटर है। यह दुनिया का 75 वां सबसे बड़ा देश है। इसकी राजधानी ग्रोज़नी है। चेचन्या की 32 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है। देश के झंडे में तीन रंग शामिल हैं: हरा, सफेद और लाल।  जिसमें हरा रंग मुसलमान होने सफेद रंग अमन शान्ति और सुर्ख रंग उन शहीदों की याद दिलाती है जिन्होंने आजादी के लिए अपना बलिदान दिया था

      चेचन्या की सरहदें  जॉर्जिया अंगोस्तीया दागेस्तान रूस से मिलती है और एक सरहद बहरी कोजबीन से मिलती है। 

     देश के वर्तमान राष्ट्रपति रमजान कदुरो हैं। राष्ट्रपति का चुनाव यहां चार साल के लिए किया जाता है।

     यह क्षेत्र आंशिक रूप से मध्य यूरोप में स्थित है। चेचन्या को मुख्य रूप से किसी भी जिले में नहीं बांटा गया है, लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती हैं। चेचन्या में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाएं चेचन और रूसी हैं। अन्य छोटी भाषाएँ भी बोली जाती हैं

     देश की 95.3 प्रतिशत आबादी में से 75 प्रतिशत चेचन वंश के हैं, और शेष 4.7 प्रतिशत में रूसी प्रतिबद्ध अनश और अन्य छोटे जातीय समूह शामिल हैं। कुछ रूसी स्रोतों के अनुसार, 1994 में हिंसा में हजारों लोग मारे गए थे। यूक्रेनी आर्मेनियाई और चीनी देश छोड़ गये थे 

     इस्लाम देश का सबसे बड़ा धर्म है देश की आबादी का पचहत्तर प्रतिशत सुन्नी मुसलमान हैं जो इमाम शाफीई का अनुसरण करते हैं। अन्य संप्रदायों में कादरी और नक्शबंदी शामिल हैं लेकिन सबसे अधिक आबादी वाले शाफी और हनफ़ी हैं  अन्य धर्मों की बहुत कम संख्या है लाफ्टर के अनुसार, 2015 में मुस्लिम ग्रोजनी में एक निन्दात्मक फिल्म का विरोध प्रदर्शन हुवा था जिसमें  लगभग 350,000 से 500,000 लोग जमा हुये थे 

     चेचन्या में शादी मे दूल्हा एक तीन-टुकड़ा पैंट कोट पहनता है, जबकि दुल्हन एक सफेद पोशाक पहनती है। यहां एक अजीब रिवाज यह है कि शादी के बाद, दूल्हा अपने ससुराल वालों से नहीं मिलता है और जब तक पेहला बच्चा पैदा नहीं होता है तब तक दुल्हन अपने ससुराल वालों से नहीं मिलती है। 

     यहां की जामा मस्जिद को देश के दिल के रूप में मानाजाता है। यह मस्जिद देश में सबसे बड़ी है। पहले लोकतांत्रिक नेता के आगमन की याद में बनाइ गइ हैं , 

     कोहे काफ का विशाल विस्तार भी उसी देश में स्थित है। यह पर्वत श्रृंखला एशिया और यूरोप के बीच जुदाई की रेखा खींचती है। जब बर्फ यहां के ग्लेशियरों की ओर पिघलती है, तो यह दृश्य दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है और दुनिया भर से हजारों पर्यटक इन दृश्यों का आनंद लेने के लिए आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह ग्लेशियर बहुत लंबा और उजाड़ है। इन पहाड़ों को पूरी तरह से नहीं देख पाया है 

     चेचन्या में वार्षिक पारंपरिक भोजन उत्सव मनाते हैं, जिसे शाह सिल्क फूड फेस्टिवल कहा जाता है, जो सबसे उत्साही और भोजन-प्रेमी लोगों के लिए एक उत्सव का अवसर है। इस त्योहार में किसी भी छोटे जानवर को पूरी तरह से भुना जाता है। इस त्योहार का आयोजन पूरे देश में किया जाता है। राष्ट्रपति इन कार्यक्रमों में जाते हैं और आम लोगों से मिलते हैं। इस दौरान, लोग सुंदर गाने और नृत्य भी करते हैं। युवा लड़कियां अपनी सुंदरता और युवावस्था के कारण मॉडलिंग करना पसंद करती हैं। और इसकी विशाल सुंदरता के कारण, यह किसी को भी आकर्षित कर सकती है, लेकिन इन मॉडल शो में, अश्लील कपड़ों के बजाय, हिजाब और पूरे शरीर को सुंदर कपड़ों से ढंका जाता है, जो यहां अच्छी और स्वच्छ संस्कृति को बनाए रखने का एक अमूल्य हिस्सा है। 

      एशिया और यूरोप के बीच तेल पाइपलाइनें इसी क्षेत्र से गुजरती हैं। कारण यह है कि रूस किसी भी परिस्थिति में इस क्षेत्र को अपने हाथों से बाहर जाने की अनुमति नहीं देता है। चेचेन को इस संबंध में सबसे अमीर क्षेत्र माना जाता है क्योंकि यहां लगभग 15,000 तेल रिफाइनरियां हैं। एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण से, रूस। अपने नियंत्रित मे लेने के लिए, उन्होंने चालीस साल तक जुल्म का बाजार गर्म रखा और 1875 में रूस ने इस क्षेत्र को अपना क्षेत्र घोषित कर दिया। 1870 से 1920 तक चेचन्या कभी रूसी कब्जे में था। और एक बार यहां आने वाले क्रांतिकारियों से जुड़े होने के बाद, इसने 1924 में सोवियत संघ ने कब्जा कर लिया। और दुसरे विश्व युद्ध के दौरान, जब जर्मन सेना ग्रोज़नी पहुंची, चेचन्या के योद्धाओं ने रूसी तानाशाह जोसेफ के खिलाफ अपनी आवाज उठा लिया। 

       1991 में लाखों मुस्लिमों का नरसंहार किया गया जब अन्य बाल्टिक राज्यों ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। वही चेचन लोगों ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की, लेकिन रूस ने उस स्वतंत्रता को मान्यता नहीं दी और दागेस्तान से चेचन्या पर आक्रमण किया। रूस ने सोचा था कि वह अपनी विशाल सेना की ताकत से चेचन्या को कबजा हासिल करेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ, और एक महीने की भीषण लड़ाई के बावजूद, रूसी सेना चेचन राजधानी ग्रोज़्नी पर कब्जा करने में असमर्थ रही। 

      1990 में, रूसी सैनिकों ने चेचन राजधानी ग्रोज़नी में फिर से प्रवेश किया, लेकिन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निकाय रूस पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाया गया और उसने अपने सैनिकों की तत्काल वापसी का आह्वान किया रूस ने 2001 में चेचन्या को  निशाना बनाया था । ऐसा कहा जाता है कि 2000 और 2008 के बीच। कई कब्रों की खोज की गई जिसमें हजारों लोगों को एक साथ दफनाया गया था  

       चेचेन की रोजगार का मुख्य स्रोत खेती भेड़ और घोड़े पालना हैं।

      रूस ने चेचन्या पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए और चेचन्या के सभी व्यापार मार्गों को बंद कर दिया चेचन्या की छह वर्षों में बेरोजगारी दर 67% थी, लेकिन वर्तमान राष्ट्रपति के अंथक प्रयासों की बदौलत, चेचन्या की आर्थिक वृद्धि तेजी से बढ़ी है और 2014 के एक रिपोर्ट के अनुसार रोजगार के स्रोतों की एक विस्तृत श्रृंखला बनाई है। रोजगार की दर केवल 21.5% है। 

      वहा की करंसी को रूबल कहा जाता है। 

      चेचन्या एक हल्की जलवायु वाला एक क्षेत्र है, लेकिन सर्दियों में यह पहाड़ों में बरफ बारी होती है, जीस्की वजासे गंभीर ठंड का कारण बनता है। 

     देश का सबसे बड़ा और सबसे ऊंचा पहाड़ अल ब्रुज़ और काजबिक हैं। इन पहाड़ों की ऊंचाई पांच हजार छह सौ बयालीस और पांच हजार तैंतीस फीट हैं । 

      चेचन्या में कई प्राकृतिक झरने हैं जहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। यदि आप चेचन्या की यात्रा करना चाहते हैं, तो आपको रूसी सरकार से अनुमति लेनी होगी। आपके पास एक साल का पासपोर्ट होना चाहिए और आप इसे रूसी वीजा वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। आप अब दिल्ली में रूसी दूतावास से भी संपर्क कर सकते हैं। चेचन्या जानेके लीये सड़क, रेलवे और हवाई अड्डे हैं। रूसी शहरों से ग्रोज़मी के लिए दैनिक उड़ानें हैं।

       चेचन मे यमी मीट परोसा जाता है। नूडल्स सबसे पसंदीदा व्यंजन माना जाता है। चेचन राष्ट्रीय पशु ग्रे वुल्फ है। यह थी चेचन्या की कुच जानकारी।

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