Tuesday, August 18, 2020

Miswak ke 70 fayde मिस्वाक करने के 70 फायदे

 अस्सलामुअलयकुम वरहमतुल्लाही वबरकातुह 

मेरे प्यारे दोस्तों आप देख रहे हैं अरकम इनफो युट्युब चैनल 

दोस्तों इस वीडियो में मिस्वाक करने के 70 फायदुं की जानकारी दीजायेगी तो वीडियो को पुरा देखे और साथ में चेनलको सब्सक्राइब जरूर करले 

तो चलीये शुरू करते हैं 

 हजरत अबू हुरैरा र.अ.से रिवायत है कि रसुलुल्लाह स.व. ने फरमाया अगर में अपनी उम्मत पर इस बात को मुश्किल न जानता तो मुसलमानों को यह हुक्म देता के वो हर नमाज के लीये मिस्वाक करे

     

       इस हदीस का मतलब ये है कि अगर मुझे इस बात का डर न होता कि मेरी उम्मत दुशवारी में पड़ जाएगी तो मैं हर नमाज़ के वक़्त मिस्वाक को ज़रूरी करार देता |


      मिस्वाक की फजीलत कई हदीसों में आई है और इसकी अहमियत का अंदाज़ा इस बात से किया जा सकता है कि ये नमाज़ का सवाब बणा देती है एक रिवायत में है कि जो नमाज़ मिस्वाक करके पणी जाये वो बगैर मिस्वाक के पणी जाने वाली नमाज़ से सत्तर दरजे  बेहतर है |

    तो चलीये जानते हैं मिस्वाक के 70 फायदुं के बारे में 

1. मिस्वाक करने में अल्लाह की खुशनुदी हैं 

2. मिस्वाक वाली नमाज का सवाब 999 गूना और बाझ कीताबों के मुताबिक 440 गुना बण जाता हैं 

3. मिस्वाक को हमेशा करना रीझक को बणाता हैं 

4. मिस्वाक रीझक के अस्बाब की सहुलत का झरीया है 

5. मिस्वाक मुंह को साफ करती है

6. मिस्वाक मसूड़ों को मजबूत करती हैं

7. मिस्वाक सर के दर्द को दूर करती है

8. मिस्वाक सर की रघुं के लिए मुफीद हैं

9.  मिस्वाक बलगम को दूर करती है

10. मिस्वाक दांतुं को मजबूत करती हैं

11.  मिस्वाक मालदारी लाती हैं

12.   मिस्वाक नजर को तीज करती हैं

13.  मिस्वाक मैदा को सही करती हैं

14.  मिस्वाक बदन को ताकत पहुंचाती हैं

15.  मिस्वाक फसाहत और बालागत को पैदा करती है

16.  मिस्वाक याददाश्त को बढ़ाती है

17.  मिस्वाक अकलमंद बना ती है

18.  मिस्वाक दिल को साफ रखती है

19.  मिस्वाक नेकीयों को ज्यादा करती है

20.  मिस्वाक फरिश्तों को खुश रखती हैं

21.  मिस्वाक से चेहरा मुनव्वर हो जाने से  फरिश्ते मुसाफा करते हैं

22.  मिस्वाक की वजह से जब वह नमाज को जाता है  तो फरिश्ते  उसके साथ चलते हैं

23.  मिस्वाक की वजह से मस्जिद की तरफ जाते वक्त  अर्श उठाने वाले फरिश्ते  उसके लिए अस्तघफार करते हैं

24.   मिस्वाक करने वाले को  अंबिया और पैगंबर की  दुआ और अस्तघफार मिलती है

25.  मिस्वाक  शैतान को  नाराज और उसे दूर करती है

26.  मिस्वाक झहन को साफ करने वाली है

27.   मिस्वाक खाना हज्म करती है

28.  मिस्वाक कसरते अवलाद का बाइस है

29.  मिस्वाक पुलसीरात पर बिजली की तरह गुजारने वाली है

30.  मिस्वाक बुढापा देरसे लाती हैं 

31.  मिस्वाक नामऐ आमाल दाहने हाथ में दिलाती है

32.   मिस्वाक जिस्म को इबादते इलाही पर उभारती है

33. मिस्वाक जिस्म की गर्मी को दूर करती है

34.  मिस्वाक बदन के दर्द को दूर करती है

35.  मिस्वाक कमर  यानी पीठ के दरद को दुर करती  हैं 

36. मिस्वाक  मोत के वक्त कलमऐ शहादत याद दीलाती हैं 

37.  मिस्वाक रूह के निकलने को आसान करती है

38.  मिस्वाक दांतों को सफेद करती है

39.  मिस्वाक मुंह को खुशगवार बनाती है

40.  मिस्वाक झहन को तेज करती है

41.   मिस्वाक से कब्र में कुशादगी होती है

42.   मिस्वाक से  कब्र में उंस का बाइस है 

43. मिस्वाक न करने के बराबर लोगुं का सवाब मीलता हैं 

44. मिस्वाक करनेवालुं के लीये जन्नत के दरवाजे खोलदीये जाते हैं 

45.  फरिश्ते मिस्वाक करने वालों की तारीफ करते हुए कहते हैं  यह लोग अंबिया के नक्शे कदम पर चलने वाले हैं

46.  मिस्वाक करने वालों पर जहन्नम का दरवाजा बंद कर दिया जाता है

47.  मिस्वाक करने वाला दुनिया से पाक व साफ  होकर जाता है

48.  फरिश्ते मौत के वक्त इस तरह आते हैं जिस तरह औलिया ऐ कीराम के पास आते हैं  बाझ किताब में है कि अंबिया की तरह आते हैं

49.  मिस्वाक करने वाले की रूह उस वक्त तक दुनिया से नहीं निकलती जबतक के  वो हमारे नबी के होझ मुबारक से रहीके मखतुम का गोंट नही पीलेता

50.  मिस्वाक करने वाले की मुंह की बदबू को खत्म करती है

51.  मिस्वाक बगल की बदबू को खत्म करती है

52.  मिस्वाक जन्नत के दर्जात को बुलंद करती हैं

53.  मिस्वाक सुन्नत का सवाब है

54.  मिस्वाक दाढ़ का दर्द दूर करती है

55.  मिस्वाक शैतान के वसवसुं को दूर करती है

56.  मिस्वाक भुक पैदा करती हैं

57.  मिस्वाक जिस्म की रुतुबत को खत्म करती हैं

58.  मिस्वाक मनी को गाढ़ा करती है

59.  मिस्वाक आवाज को खूबसूरत करती है

60.  मिस्वाक पित्त की तेजी को बुजाती है

61.  मिस्वाक जुबान के मेल को साफ करती है

62.  मिस्वाक गला साफ करती हैं

63. मिस्वाक जरूरतों को पूरा करने में मददगार है

64.  मिस्वाक मुंह में खुशबू पैदा करती है

65.   मिस्वाक दर्द को सुकून देती है

66.  मिस्वाक मौत के अलावा हर मर्ज से शिफा है

67.  मिस्वाक जिस्म का रंग निखारती है

68.  मिस्वाक चेहरे को बा रोनक बनाती हैं

69.   मिस्वाक बालको उगाती है

70.  मिस्वाक का आदि जिस दिन मिस्वाक न करे  उस दिन भी सवाब लिखा जाता है


      तो मेरे प्यारे दोस्तों हर मुसलमान को इस सुन्नत को ज़रूर अपनाना चाहिए।अपने रोज़ाना की पांच वकत की नमाज में पांच बार मिस्वाक करने की आदत डालें और दूसरों को भी यह सलाह दें।


      तो मेरे प्यारे दोस्तों जानकारी अच्छी लगीहोतो वीडियो को लाइक करे और दोस्तों के साथ शेर करे और इसी तरह की इस्लामीक जानकारी पाने के लिये हमारी चेनलको सब्सक्राइब जरूर करें 

अस्सलामुअलयकुम वरहमतुल्लाही वबरकातुह

Wednesday, August 5, 2020

Quran ki maloomat hindi कुरआन की दिलचस्प मालुमात


स.  कुरआन शरीफ क्या है ?
ज.   पूरी दुनिया और  दुनिया की तमाम लोगों की हिदायत के लिए अल्लाह ताआला  का वो कलाम जो आसमानों पर से जिब्रइल अ.स.के जरिए मुहम्मद (स. अ. व.) पर नाजिल किया गया  उस कलाम को कुरआन शरीफ कहते हैं
स.  कुरआन शरीफ के और क्या क्या नाम है?
ज.   कुरआन शरीफ के सिफाती नाम तो बहुत है मगर उसके हकीकी नाम पांच है (1) कुरआन (2)अल फुरकान  (3)अझ झिक्र  (4)अल किताब (5) अत तंजील  इनमें सबसे ज्यादा मशहूर    कुरआन है
स.  कुरआन शरीफ में कितनी मर्तबा कुरआन के नाम से याद किया गया है? 
ज. 61 जगह पर कुरआन को कुरआन के लफ्ज से याद किया गया है
स. कुरआन का मतलब क्या है
ज. कुरआन अरबी जबान का लफ्ज है जिसका मतलब है पड़ी हुई किताब  जिसको पडा जाता हो
स. कुरआन शरीफ आसमान से किस तरह उतारागया है? 
ज. कुरआन शरीफ अल्लाह ताआला के पास लोहे महफूज में मौजूद है वहासे दो मर्तबा उतारा गया है  पहली मर्तबा लोहे महफूज से पहले आसमान पर पूरा कुरआन एक साथ शबे कद्र में उतारा गया. दूसरी मर्तबा जब आप स. अ. व. की  उम्र मुबारक 40 साल हुई तब से शुरू होकर 23 साल 5 महीने में थोड़ा-थोड़ा करके पूरा कुरआन उतारा गया.
स.  कुरआन शरीफ में कितने पारे हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में 30 पारे हैं
स.  कुरआन शरीफ में कितनी सूरते हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में 114 सुरते हैं
स.  कुरआन शरीफ में मक्की सूरते और मदनी सूरते कितनी हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में 28 मदनी सूरते और 86 मक्की सूरते हैं
स.  मक्की सूरत का क्या मतलब होता है? 
ज. जो आयत या सूरत हिजरत से पहले नाजिल हुई है  इसको मक्की कहा जाता है 
स.  मदनी सूरत का क्या मतलब होता है? 
ज.  जो आयत या सूरत हिजरत के बाद नाजिल हुई है  इसको मदनी सूरत कहा जाता है
स.  कुरआन शरीफ में कितने रुकुअ हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में 558 रुकुअ हैं
स.  कुरआन शरीफ में कुल कितनी आयात है? 
ज.  कुरआन शरीफ में कुल 6236 आयात है
स.  कुरआन शरीफ में कितनी सजदह की आयतें हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में 14 सजदह की आयतें हैं
स.  कुरआन शरीफ में सबसे बड़ी सूरत कौन सी है? 
ज.  कुरान शरीफ में सबसे बड़ी सूरत सुरऐ बकराह है जिसमें 40 रुकुअ और 286 आयात हैं 
स.  कुरआन शरीफ में सबसे छोटी  सूरत कौन सी है ? 
ज.  कुरआन शरीफ में सबसे छोटी सूरत सूरऐ कौसर हैं जिसमें  फक्त  तीन आयतें हैं
स.   कौन सी सूरत सबसे पहले नाजिल हुई? 
ज.   सुरये अलक 30 वे पारे की 96 नमबर की सुरत नाझील हुइ
स.  सूरह फातिहा को फातिहा क्यों कहते हैं? 
ज.  फातिहा का मतलब होता है शुरू करने वाली  चुके यह सूरत कुरआन के शुरू में है इसलिए उसे सूरह फातिहा कहते हैं
स.  आयत किसको कहते हैं? 
ज.  आयत का मतलब है निशानी और  कुरआन की एक एक आयत समझने वालों के लिए हक की निशानी है इसलिए उसे आयत  कहते हैं
स.  कुरआन के बारे में क्या अकीदा होना चाहिए? 
ज.  जो कुछ कुरआन में है वह सब हक और सच है और जो कुरआन के खिलाफ है वह सब बातिल है
स.  कुरआन शरीफ में अल्लाह का जाति नाम अल्लाह कितनी मर्तबा आया है? 
ज.  कुरआन शरीफ में अल्लाह तआला का जाती नाम अल्लाह  2584  मर्तबा आया है
स.  ऐसी कौन सी सूरत है जिसकी हर आयत में अल्लाह लफ्ज़ आया है? 
ज.  28 वे पारे में  सूरऐ  मुजादलह  ऐसी सूरत है के जिसमें 22 आयतें हैं और उसकी हर आयत में एक एक दो दो मर्तबा अल्लाह लफ्ज़ आया है  पूरी सूरत की 22 आयत में कुल 40 मर्तबा अल्लाह  लफ्ज आया है
स.   कुरआन शरीफ में आप स. अ. व. का  जाति नाम मुहम्मद  कितनी मर्तबा आया है?
ज.  कुरआन शरीफ में 4 मर्तबा मुहम्मद नाम आया है
स.  कुरआन शरीफ में मुहम्मद   नाम के अलावा दूसरे नामों से कितनी मर्तबा जिक्र हुआ है? 
ज.  216 मर्तबा मोहम्मद के अलावा दूसरे नामों से जिक्र हुआ है
स.  कुरआन शरीफ में कितनी नबीयों का जिक्र हुआ है? 
ज.   कुरआन शरीफ में 25 नबीयों का नाम आया है
स.   कुरआन शरीफ में कितने परिंदों का जिक्र हुआ है? 
ज.  कुरआन शरीफ में 6 परिंदों का जिक्र हुआ है
स.  कुरआन शरीफ में कितनी मस्जिदों का जिक्र हुआ है? 
ज.  कुरआन शरीफ में 5  मस्जिदों का जिक्र हुआ है (1) मस्जिदे हराम(2)  मस्जिदे नबवी(3)  मस्जिदे कुबा(4) मस्जिदे अक्सा(5) मस्जिदे  जीरार( मुनाफिकून की बनाई हुई मस्जिद) 
स.  कुरआन शरीफ में जन्नत के  किन  नामों का जिक्र हुआ है? 
ज.  कुरआन शरीफ में जन्नत के सात नामों का जिक्र हुआ है (1) जन्नते  अदन(2)  जन्नतुन्नइम(3)  जन्नतुल फिरदौस(4) जन्नतुल मअवा(5) दारुस्सलाम(6) दारुल करार(7) जन्नते इल्लीयीन
स.  कुरआन शरीफ में  जहन्नम के किन नामों का जिक्र है?
ज.   कुरआन शरीफ में जहन्नम के 7 नामों का जिक्र है(1) जहन्नम (2) लजा (3) हुलमह (4)  सइर (5) सकर  (6) जहीम (7)हावीया
स. कुरआन  शरीफ में कितने फरिश्तों का नाम के साथ  जिक्र है? 
ज. कुरआन शरीफ में 12 फरिश्तों का नाम के साथ  जिक्र है (1) जिब्राइल अ.स.(2) मिकाइल अ.स.(3) मालिक अ.स(4) हारुत अ.स (5) मारूत अ.स (6)रअद  अ.स. (7)बरक अ.स. (8)सीजल अ.स. (9)कइद अ.स. (10)झुलकरनैन  अ.स. (11)अस्सकीना अ.स.  (12)कीरामन कातीबीन अ.स. 
स.  कुरआन शरीफ में कितने सहाबा का नाम के साथ जिक्र है? 
ज.   कुरआन शरीफ में सिर्फ एक सहाबी का नाम के साथ  जिक्र है  हजरत जैद बीन हारीसा र. का 22 वे पारेमे सुरऐ अहजाब मे  जिक्र है 
स.  उर्दू जुबान में सबसे पहले  कुरान की तफसीर कीस्ने लिखी? 
ज.  उर्दू जुबान में सबसे पहले कुरान की तफसीर  शाह अब्दुल कादिर साहब देहलवी र. अ. ने सं हीजरी 1245 मे लीखी
स.  कुरआन शरीफ मैं एक ऐसा  निकाह  का बयान है जो आसमान पर खुद अल्लाह तआला ने  करवाएं  वह कौन सा निकाह है ?
ज.  वह हजरत मुहम्मद स. अ. व. का हजरत झैनब र.अ. के साथ निकाह हे जो आस्मान पर अल्लाह ने खुद करवाये. 
स.  कुरआन शरीफ में कौन सी सूरत के शुरू में बिस्मिल्लाह नहीं है? 
ज.दसवे पारेमे सुरऐ तौबा के शुरु मे  बिस्मिल्लाह नहीं है
स.  कुरआन शरीफ में नमाज का जिक्र  कितनी मर्तबा आया है? 
ज. कुरआन शरीफ में नमाज का जिक्र 700 मर्तबा आया है
स. कुरआन शरीफ का दिल कोनसी सूरत को कहते हैं? 
ज. सूरऐ यासीन को  कुरआन शरीफ का दिल कहते हैं
स.  कौन सी सूरत को दुल्हन कहा जाता है
ज.  सूरऐ रहमान को  दुल्हन कहां जाता है जो 27 वे पारे मे 55 वी सुरत है
स.   मुअव्वझतैन कौन सी सुरत को कहते हैं? 
ज. मुअव्वझतैन 113/114 वी सुरत यानी सुरऐ फलक और सुरऐ नास को कहते हैं 
स.  हजरत उमर र.अ. कौनसी सुरत सुनकर इमान लाये? 
ज.  हजरत उमर र. अ. सुरऐ ताहा की शुरु की आयते सुनकर इमान लाये. 
स.  कुरआन शरीफ आधा कहां पर होता है? 
ज.  कुरआन शरीफ के  15 वे  पारे मे सुरऐ कहफ की आयत नमबर 19 मे वलयतलत्तफ पर आधा कुरआन  होता है 
स.  कुरआन शरीफ में कतनी औरतों का नाम आया है? 
ज.   कुरआन शरीफ में सिर्फ एक औरत हजरत  मरियम अ.स. का नाम आया हैं 
स.  कुरआन शरीफ में सबसे लंबी आयत कौन सी है ? 
ज.   कुरआन शरीफ में सबसे लंबी आयत  सूरह बकरह की  आयत नंबर 282 है जिसमें 540 हर्फ  है 
स.   कुरआन शरीफ में कितनी  सुरतेंं नबीयों के नाम पर हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में 6 सुरतें नबीयुं के नाम पर है (1) सूरऐ यूसुफ(2) सूरऐ हुद(3)सुरऐ युनुस(4)सुरऐ इब्राहिम (5)सुरऐ नुह(6) सुरऐ मुहम्मद स.अ.
स. कुरआन शरीफ में मरतबे मे कोनसी आयत सबसे बडी हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में आयतुल कुर्सी  मरतबे में सबसे बडी हैं 
स.  कुरआन शरीफ में सबसे ज्यादा उम्मीद दिलाने वाली आयते कौन सी है? 
ज.  कुरआन शरीफ में 24 वे पारे की सूरह जुमर की आयत नमबर 53 सबसे ज्यादा उम्मीद दिलाने वाली आयत हैं 
स.  कुरआन शरीफ में सबसे ज्यादा डराने वाली आयत को नसी हैं ? 
ज.  कुरआन शरीफ में सबसे ज्यादा डराने वाली आयत सूरह बकरा की 278 वी आयत है
स.  जन्नती लोगों को सबसे ज्यादा खुशी किस आयत में हैं? 
ज.  जन्नती लोगों को सबसे ज्यादा खुशी सुरऐ युनुस की आयत नंबर 26 में हैं
स.  जहन्नमी लोगों के लिए सबसे खतरनाक आयत कौन सी है? 
ज.  जहन्नमी लोगों के लिए सबसे खतरनाक आयत सुरऐ नबा की आयत नम्बर 30। हैं। 

स. कुरआन शरीफ में मंझीलें कीतनी हैं? 
ज. कुरआन शरीफ में मंझीलें 7 हैं 
स. कुरआन शरीफ में सुरऐ सजदह में यवमुल फतह कीस दीन को कहा गया है? 
ज. कुरआन शरीफ में सुरऐ सजदह में  यवमुल फतह कयामत के दीन को कहा गया हैं।
स।. कुरआन शरीफ में कुल कितने हर्फ हैं? 
ज.  कुरआन शरीफ में कुल  323671 हर्फ हैं 

Tuesday, August 4, 2020

सेब खाने के फायदे जो आप पढ़ कर हैरान रह जाओगे

सेब के फायदे के बारे में बात करें तो  सेब पोषक तत्वों से भरपुर भंडार माना जाता है। सेब सामान्य से लेकर गंभीर शारीरिक समस्याओं का इलाज करने कीह ताकत रखता है। सेब आपको खुन की कमी, डायबिटीज , हृदय रोग, दमा और  कैंसर जैसी बडी बीमारी से बचाने का काम कर सकता हैं। सिर्फ बिमारी ही नहीं, बल्कि खूबसूरत त्वचा और खूबसूरत बालों के लिए भी सेब खाना बहुत फायदे हैं। 
     तो  चलिए जानते हैं रोज़ाना एक सेब खाने से हमे क्या क्या फायदे मिलते हैं 
      दोस्तों एनीमिया ऐसा रोग हे जीस्मे लीवर कमजोर पडनेसे शरीर मे खुन बन्ना बंद होजाता है जीस्से खुन की  कमी होजाती है तो खुन की कमी को दुर करने के लिए सेब बेहतरीन उपाय हैं रोजाना ऐक सेब खाकर उपर से एक ग्लास दुध पीये यातो सेब का ज्यूस बनाकर एक महीने तक पीया जाये तो खुन की कमी दुर होजायेगी क्योंकि सेब मे भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता हैं। 
      जीन लोगुंकी हड्डियां कमजोर है हाथ पैरों में दर्द रहता हो कमर में दर्द रहता हो या  बच्चों के हाथ पैर कमजोर हो तो सेब का सेवन बहुत ही फायदेमंद है क्योंकि सेब मे काफी मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है 
      
     सेब में एंटीऑक्सीडेंट्स पाया जाता हैं, जो त्वचा से जुड़ी समस्या को दूर करता हैं अगर आप के चेहरे पर काले दाग धब्बे मुहासे है या चेहरा पीला दीखता है तो रोजाना सुबह एक सेब जरूर खाये जीस्से त्वचा से दाग धब्बे दुर हो कर त्वचा चमकदार जवान दीखेगी

   सेब मे एन्टी बैक्टेरियल होनेकी वजासे इम्यूनिटी यानी बीमारियों लेडनेकी ताकत बढाकर धातक बीमारियों से बचाता है क्योंकि सेब में कई तरह के विटामिन मिनरल मौजूद होते है जो बीमारियों से बचाता है 
     दोस्तों सेब के और कइ फायदे है जैसा कि ह्रदय को ताकत देता है हार्ड अटैक से बचाता है कोलेस्ट्राल लेवल को कंट्रोल में रखता है शरीर के वजन को बढने नही देता दीमाग को ताकत देकर याद शक्ति को बढाता है लीवर को ताकत देता है कीडनी की पथरी होने से बचाता है आंखों की रोशनी को बढाता है 
   तो दोस्तो रोजाना एक सेब खाया जाये तो हम कइ सारी बीमारियों से बचे रहेंगे और शरीर स्वस्थ जवान बना रहेगा

Sunday, July 19, 2020

कुर्बानी के दिनों में कुर्बानी से बढ़कर कोई अमल नहीं

कुर्बानी के दिनों में कुर्बानी से बढ़कर कोई अमल नहीं

     नबी सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया कुर्बानी के दिन में कोई अमल अल्लाह ताला को खून बहाने से ज्यादा पसंदीदा नहीं है और यह कुर्बानी का जानवर कयामत के मैदान में अपने सिंघो बालों और खुरों के साथ आएगा, और कुर्बानी में बहाया जाने वाला खून जमीन पर गिरने से पहले अल्लाह ताला के दरबार में क़बूलियत का मकाम हासिल कर लेता है इसलिए खुश दिल्ली से कुर्बानी किया करो. 

कुर्बानी के बजाये सदका काफी नहीं

 यह बात जान ले के कुर्बानी के दिनों में जानवर का ज़बह करना ही ज़रूरी है, जानवर की कीमत के सदका करने से काम नहीं चल सकता है, और जो शख्स मालदार होने के बावजूद कुर्बानी नहीं करेगा वह सख्त गुनहगार होगा क्योंकि वह वाजिब को छोड़ने वाला है.

आजकल कुछ *मॉडर्न सोच* वाले लोग कुर्बानी के बजाय सदका करने पर ज़ोर देते हैं तो उनकी यह बात शरीयत के बिलकुल खिलाफ है.

कुर्बानी किस पर वाजिब है?

 जिस पर सदक़ए फित्र वाजिब है उस पर बकरा ईद के दिनों में कुर्बानी करना भी वाजिब है, और अगर इतना माल ना हो कि जिस पर सदक़ए फ़ितर  वाजिब होता हो तो उस पर कुर्बानी वाजिब नहीं है लेकिन फिर भी अगर कर दे तो सवाब है.

बीवी बच्चों की तरफ से कुर्बानी?

 कुर्बानी सिर्फ अपनी तरफ से करना वाजिब है औलाद की तरफ से वाजिब नहीं, बल्कि अगर नाबालिग औलाद मालदार भी हो तब भी उसकी तरफ से करना वाजिब नहीं है, ना अपने माल में से ना उसके माल में से, क्योंकि उस पर कुर्बानी वाजिब ही नहीं होती. लेकिन अगर बाप अपने माल में से अपनी नाबालिग औलाद की तरफ से कुर्बानी कर दे तो मुस्तहब / अच्छा है .

बीवी और बालिग औलाद मालदार हो तो उनको अपनी तरफ से कुर्बानी करना वाजिब है.

 कुर्बानी के 3 दिन हैं यानी 10/ 11/ और 12/ जि़लहिज्जा, इससे पहले या बाद में कुर्बानी मोतबर नहीं है .

कौन से दिन कुर्बानी अफज़ल/ बेहतर है?

 10 ज़िलहिज्जा को कुर्बानी करना सबसे अफज़ल है ,उसके बाद 11/और 12 ज़िलहिज्जा का दर्जा है .

रात में कुर्बानी करना ?

 कुर्बानी के दिनों में रात में कुर्बानी करना मकरु है इसलिए रात में कुर्बानी ना करें और अगर रात में कुर्बानी करें और अगर रात में कुर्बानी करे तो रोशनी वगैरह का अच्छा इंतजाम रखे, ऐसा ना हो कि अंधेरे की वजह से ज़बह में कमी रह जाए.

कुर्बानी के वक्त में शहर और गांव का फर्क

 कुर्बानी का असल वक्त 10/ ज़िलहिज्जा की सुबह सादिक से शुरू होकर 12/ ज़िलहिज्जा के सूरज डूबने तक रहता है,

 जिस बड़ी आबादी में ईद की नमाज होती है वहां ईद की नमाज के बाद ही कुर्बानी दुरुस्त होगी और जहां ईद की नमाज जाइज़ ना हो जैसे छोटे गांव और देहात तो वहां सुबह सादिक के फ़ौरन बाद से कुर्बानी दुरुस्त है.

 ईद की नमाज के बाद ख़ुत्बा  से पहले कुर्बानी

 अगर ईद की नमाज के बाद ख़ुत्बा से पहले कुर्बानी की तो दुरुस्त हो जाएगी लेकिन ऐसा करना अच्छा नहीं है, बेहतर यह है कि ख़ुत्बा के बाद ही कुर्बानी की जाए.

इमाम ने बगैर वजू ईद की नमाज पढ़ा दी तो नमाज और कुर्बानी का क्या हुकुम है?

अगर इमाम ने भूल से बगैर वजू ईद की नमाज पढ़ा दी फिर ईदगाह में मजमा बिखर जाने के बाद उसे याद आया तो दोबारा ईद की नमाज का हुकुम नहीं है; लेकिन अगर मजमा बिखरने से पहले याद आ गया तो ईद की नमाज दोहराई जाएगी,

और अगर कोई शख्स ऐसी सूरत में नमाज दोहराने से पहले कुर्बानी कर दे तो उसकी कुर्बानी दुरुस्त मानी जाएगी.

ईदगाह की नमाज के बाद कुर्बानी

अगर ईदगाह में ईद की नमाज अदा कर ली गई हो और मेहल्लों की मस्जिदों में 
 ईद की नमाज में देर हो तो भी कुर्बानी करना दुरुस्त है.



 कुर्बानी के सही होने के लिए शहर में किसी भी जगह ईद की नमाज़ होना काफी है

 अगर शहर में किसी जगह ईद की नमाज़ पढ़ ली जाए तो पूरे शहर वालों के लिए कुर्बानी करना दुरुस्त हो जाता है इसमें ईदगाह या जामा मस्जिद वगैरह की नमाज़ का होना ज़रूरी नहीं है-

 जिस शहर में कुर्बानी की जाए वहीं की ईद की नमाज़ का ऐतबार है

अगर किसी शख्स ने दूसरे शहर में कुर्बानी का इंतज़ाम किया हो तो उसी शहर में नमाजे ईद के बाद कुर्बानी दुरुस्त होगी (मान लीजिए अगर मालिक के शहर में ईद की नमाज ना हुई हो तो उसका इंतजार नहीं किया जाएगा)


वो रगे जिन का काटना ज़रूरी है

जानवर के गले मे चार रगे होती हैँ। 
1) हुलक़ूम (सांस की रग )
2) मर्री (खाने पीने की रग )
3-4) दोषा रगे (खून की नालिया )
इन चारो रगो मे से किसी भी तीन का काटना ज़रूरी है, 
गुध्धी (गर्दन )की तरफ से काटना मकरु है। 

अगर गर्दन अलग हो गई

अगर ज़िबाह करते वक़्त गर्दन अलग हो गई,तो क़ुर्बानी दुरुस्त है,  मगर मकरु होगी (एहतियात से ज़िबाह करें )

तस्मियां (बिस्मिल्लाह, अल्लाहु अकबर )पढ़ना

ज़िबाह करते वक़्त बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर पढ़ना ज़रूरी है, अगर भूल जाये,तो कोई बात नहीं, 
अगर जानबूझ कर बिस्मिल्लाह छोड़ दिया तो जानवर हराम है, 
बाज़ दफा एक या दो रग कटने पर ही क़साईं छुरी ले लेता है, तो उस वक़्त क़साईं पर भी तसमियां ज़रूरी है,ज़िबाह मे मदद करने वालो पर भी बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर पढ़ना ज़रूरी है, 
ज़िबाह करने मे छुरी पकड़ कर जो मदद कर रहा उस पर भी बिस्मिल्लाह पढ़ना ज़रूरी है.


 कम कीमत की वजह से दूसरी जगह कुर्बानी

सस्ती कीमत की वजह से दूसरी जगह कुर्बानी कराने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन यह बात याद रहे कि माली इबादत में जितना ज्यादा रुपया खर्च किया जाता है सवाब उतना ही ज्यादा मिलता है -

 दिखावे के लिए महंगा जानवर खरीदना

आज कल  कुछ लोग सिर्फ नाम वरी और दिखावे के लिए ज्यादा कीमत का जानवर खरीदते हैं और फिर उसका खूब चर्चा करके खुश होते हैं तो इस दिखावे के साथ सवाब की उम्मीद रखना सिर्फ धोखा है अल्लाह ताला के नजदीक वही अमल मकबूल है जो सिर्फ अल्लाह को राजी करने के लिए किया जाए दिखावे का जानवर कितना ही कीमती हो अल्लाह की नजर में उसकी कोई कीमत नहीं -  


अगर जानवर के पेट से बच्चा निकला?

अगर जानवर के पेट से ज़िंदा बच्चा निकला तो उसको भी ज़िबह कर दें, 
अगर मरा हुआ बच्चा निकला तो वो बच्चा हलाल नहीं उसको दफन कर दें। 

मकरूहात

जानवर के सामने या जानवर को गिराने के बाद छुरी वगैरह तेज़ करना मकरू है,(छुरी पहले ही तेज़ कर लें, )
क़ुर्बानी के जानवर पर सवारी करना मकरू है, 
जानवर ज़िबह करने के बाद जानवर के ठंडा होने से पहले मुंडी फोड़ना या खाल उतारना मकरू है, (ठंडा होने के बाद ये काम करें )
क़ुर्बानी का जानवर किराए पर देना मकरू है, 
क़ुर्बानी के जानवर का बाल और दूध निकालना मकरू है (अगर बाल या दूध निकाल लिया है तो सदक़ा करना ज़रूरी है)

क़ुर्बानी करने वाला एक ज़िल हिजजा से क़ुर्बानी तक बाल वगैरह ना काटे

जिसकी तरफ से क़ुर्बानी होने वाली है उसके लिए मुस्तहब ये है, के ज़िल हिजजा का महीना शुरू होने के बाद से क़ुर्बानी तक बदन के बाल और नाख़ून वगैरह ना काटे (ये अमल मुस्तहब है )
(मुस्लिम शरीफ किताब उल अज़हिया )

मुफ़्ती मुहम्मद फैज़ान क़ासमी रामपुरी


 मालदार की कुर्बानी का जानवर गुम हो गया

  जिस शख्स पर कुर्बानी वाजिब हो और उसने जो जानवर कुर्बानी की निय्यत से रखा हो वह कुर्बानी से पहले गुम हो जाए तो उस पर उसकी जगह दूसरे जानवर की कुर्बानी जरूरी होगी -

 मालदार की कुर्बानी का जानवर मर गया

    मालदार शख्स ने कुर्बानी के लिए जो जानवर तय किया था अगर वह कुर्बानी से पहले मर जाए तो उस पर दूसरे जानवर की कुरबानी जरूरी होगी -

 मालदार का कुर्बानी के जानवर को बदलना

      मालदार शख्स को इख्तियार है कि वह अपना तय क्या हुआ जानवर कुर्बानी से पहले बदल ले और उसकी जगह दूसरे जानवर की कुर्बानी करे; कियोंकी मालदार शख्स के तय करने से पहले कुर्बानी का जानवर तय नहीं होता इसलिए उसे बदलने का इख्तियार रहता है-                                                                   

क़ुर्बानी के जानवर की खाल

क़ुर्बानी के जानवर की खाल सदक़ा की जा सकती है, और अगर खाल को ऐसे ही इस्तेमाल मे लाया जा रहा है,तो जाइज़ है, जैसे जानमाज़ बनाना वगैरह, 
अलबत्ता अगर खाल को बेच दिया है,तो अब उसकी क़ीमत को इस्तेमाल मे लाना जाइज़ नहीं है,बल्कि क़ीमत सदक़ा कर दें, 
और खाल के अलावा दूसरे अंग जैसे: हड्डी खाल वगैरह को बेचना जाइज़ नहीं, अगर किसी ने बेच दिया तो उसकी क़ीमत सदक़ा करना ज़रूरी है
इसी तरह जान की खाल वगैरह को मज़दूरी के तोर पर क़साइ को देना दुरुस्त नहीं है,अगर दे दिया तो इतनी क़ीमत सदक़ा करना ज़रूरी है (अगर उजरत के अलावा दे,तो कोई हर्ज नहीं )

हलाल जानवर के वो सात आज़ा जिनका खाना जाइज़ नहीं

1) मुजककर जानवर की शर्म गाह
2) मॉन्नस जानवर की शर्म गाह 
3) मुज़ककर जानवर का खुसया 4) मसाना
 5) गदूद
 6) हराम मगज़ जो रीड़ की हड्डी मे रहता है,  
7) पित्ता (वो थैली जो जानवर की कलेजी से लगी रहती है )
दमे मसफूह (रगो मे बहने वाला पतला खून )बिलकुल हराम और नापाक है, 
हलाल जानवर की ओजड़ी खाना बिला कराहत जाइज़ है, 


 ग़रीब शख्स की कुर्बानी का जानवर गुम हो गया

अगर ऐसे शख्स ने जिस पर कुर्बानी वाजिब ना थी कोई जानवर कुर्बानी की नियत से खरीद लिया था फिर वह कुर्बानी से पहले गुम हो गया तो उस पर दूसरे जानवर की कुर्बानी जरूरी नहीं है,

 ग़रीब शख्स की कुर्बानी का जानवर मर गया

गरीब शक्स ने कुर्बानी के लिए जानवर खरीदा था या मन्नत के तौर पर तय किया था फिर वह कुर्बानी से पहले मर गया तो उस पर दूसरे जानवर की कुरबानी जरूरी नहीं है-

 ग़रीब का कुर्बानी के जानवर को बदलना

गरीब शख्स ने अगर जानवर कुर्बानी के लिए जुबान से कहकर तय कर लिया हो तो अब उसके लिए बदलने की इजाजत नहीं बल्कि उसी तय किए हुए जानवर की कुर्बानी जरूरी है-                                                                  

ज़िबह करने का मस्नून तरीक़ा

अपने जानवर को खुद अपने हाथो से ज़िबह करें,अगर अपने हाथ से नहीं कर सकता है,तो दूसरे से ज़िबह कराने मे कोई हर्ज नहीं,मगर बहतर ये है के ज़िबह के वक़्त खुद वहां मौजूद रहे। 
पहले छुरी खूब अच्छी तरह तेज़ करले। 
जानवर को क़िब्ला रुख इस तरह लिटाए, के उसके चारो पैर और हलक़ क़िब्ला रुख हों,और ज़िबह करने वाला गर्दन के पास इस तरह खड़ा हो के उसका रुख भी क़िब्ले की तरफ हो जाए। 
क़ुर्बानी की नियत सिर्फ दिल से करना काफ़ी है,ज़बान से नियत के अल्फाज़ कहना ज़रूरी नहीं,अलबत्ता ज़िबह करते वक़्त ज़बान से बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर कहना ज़रूरी है۔

 फिर ये दुआ पढ़ें....

إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ حَنِيفًا ۖ وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ، إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ 
الْعَالَمِينَ".
 और ज़िबह करने से पहले  ये दुआ पढ़े...

"اللّٰهُم َّمِنْكَ وَ لَكَ"’’بسم اللہ اللہ اکبر‘‘

और ज़िबह करने के बाद ये दुआ पढ़े

"اَللّٰهُمَّ تَقَبَّلْهُ مِنِّيْ كَمَا تَقَبَّلْتَ مِنْ حَبِيْبِكَ مُحَمَّدٍ وَ خَلِيْلِكَ إبْرَاهِيْمَ عليهما السلام".

अगर किसी और की तरफ से ज़िबह कर रहा हो तो "مِنِّيْ" की जगह " مِنْ " के बाद उस शख्स का नाम ले..  

क़ुर्बानी के बदले क़ुर्बानी की रक़म सदक़ा खैरात नहीं कर सकते

क़ुर्बानी के तीन दिनों मे जानवर की क़ुर्बानी ना करके इतनी रक़म गरीबो, मिसकीनो या किसी और ज़रूरत की जगह देने से ये वाज़िब अदा नहीं होगा, बल्कि हमेशा गुनहगार रहेगा। कुछ लोग कहते हैँ, के हर साल क़ुर्बानी मे इतनी रक़म सारे मुस्लमान खर्च करते हैँ, वही रक़म से ना जाने कितने गरीबो की शादीयां हो सकती हैँ, और कितने गरीबो के  रोज़गार का इन्तिज़ाम किया जा सकता है, या फसाद ज़दा इलाको मे क़ुर्बानी की रक़म से इमदाद की जा सकती है, 
ऐसी बात दीने इस्लाम से ना वाक़िफ़ और इस्लाम से बेज़ार लोग ही कह सकते हैँ,  उनसे कोई पूछे ये तमाम काम तुम्हारे क़ुर्बानी करने से रुके हुए हैँ क्या? ये बात अच्छी तरह याद रखो के नमाज़ एक अलग इबादत है, रोज़ा एक अलग इबादत है, नमाज़ से रोज़े का फ़र्ज़ अदा नहीं होगा, और रोज़े से नमाज़ का फ़र्ज़ अदा नहीं होगा, इसी तरह सदक़ा खैरात एक अलग इबादत है, और क़ुर्बानी एक अलग इबादत है, क़ुर्बानी की इबादत सदक़ा खैरात से अदा नहीं होगी, बल्कि क़ुर्बानी के अमल से hi अदा होगी,, इसी पर नबी करीम (स अ व )और तमाम सहाबा और ताबाईन का तअमुल है। 


 जानवर गुम होने के बाद मिल गया

अगर गुमशुदा जानवर बाद में मिल जाए तो उसकी कई सूरते हैं:

(१) अगर मालदार का गुमशुदा जानवर मिला है तो उस पर खास उसी जानवर की कुरबानी जरूरी नहीं है बल्कि किसी भी एक जानवर की कुरबानी कर सकता है -

(२) गरीब शख्स का गुमशुदा जानवर मिल गया और उसने अभी कोई और जानवर कुर्बानी की नियत से नहीं खरीदा था तो उस पर सिर्फ हासिल सुधा यानी मिले हुए जानवर की कुर्बानी करना ज़रूरी है-

(३) और अगर गुमशुदा के मिलने से पहले गरीब कोई और जानवर कुर्बानी के लिए खरीद चुका था बाद में गुमशुदा भी मिल गया तो अब उस पर नए खरीदे हुए और हासिल शुदा यानी गुम होने के बाद मिले हुए दोनों जानवरों की कुर्बानी ज़रूरी होगी -                                                

 मरहूम की तरफ से कुर्बानी

 अगर कोई शख्स अपने मरहूम रिश्तेदारों की तरफ से नकली कुर्बानी करें तो इसमें कोई हर्ज नहीं है और यह तरीका उम्मत में बगैर किसी इखतिलाफ के जारी है और इस तरह की कुर्बानी का गोश्त कोई भी खा सकता है इसमें फकीर या ग़रीब का होना ज़रूरी नहीं है,

 हुजूर की तरफ से कुर्बानी

अगर कोई शख्स अपनी तरफ से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जानिब से कुर्बानी करे तो इसमें कोई हर्ज नहीं बल्कि ये खुश नसीबी के हासिल करने का जरिया है
 

कुर्बानी की कज़ा

 अगर वक़्त पर कुर्बानी ना की जा सकी हो और जानवर पहले से मौजूद हो तो  वक़्त गुज़रने के बाद उसी जानवर को ज़िंदा सदका करना ज़रूरी है, 

कुर्बानी के दिनों के बाद पूरे जानवर ही की कीमत का सदका

अगर किसी शख्स पर कुर्बानी वाजिब थी लेकिन उसने कुर्बानी के दिनों में ना तो कुर्बानी की और ना जानवर खरीदा तो बाद में उस पर एक बकरे की कीमत का गरीबों पर सदका करना वाजिब है (यानी अब बड़े जानवर के सातवें हिस्से की कीमत काफी ना होगी बल्कि पूरे जानवर ही की कीमत देनी ज़रूरी होगी -

कई वर्षों से वाजिब कुर्बानी नहीं की

 अगर मालदार शख्स ने मालदार होने के बावजूद कुर्बानी छोड़ दी और कई साल तक कुर्बानी नहीं की तो हर साल की कुर्बानी के बदले में एक बकरा या बकरी की कीमत का सदका करना ज़रूरी है 

कौन कौन से जानवरों की कुर्बानी जाइज़ है?

  कुर्बानी क्योंकि एक खास इबादत का नाम है इसलिए हर हलाल जानवर की कुर्बानी जाइज़ नहीं बल्कि उसके लिए कुछ खास जानवर फिक्स हैं सिर्फ उन्हीं की कुर्बानी जाइज़ है, और वह जानवर यह हैं:

 *(१) ऊंट* *(२) ऊंटनी*

 *(३) गाय* *(४) बैल* 

*(५) भैंस* *(६) भैंसा*

 *(७) बकरा* *(८) बकरी*

 *(९) दुंबा* *(१०) मेंढा-*


कुर्बानी के जानवरों की उम्र

▪ऊंट, ऊंटनी : कम से कम पांच साल-

▪गाये, बैल , भैंस, भैंसा: कम से कम दो साल-

▪बकरा, बकरी, दुंबा, भेड़, मेंढा: कम से कम एक साल -

 अगर कुर्बानी के जानवरों की उम्र ऊपर बताई गई उम्र से कम हो, भले एक दिन ही सही, तो ऐसे जानवर की कुर्बानी जाइज़ नहीं -

छे (६) महीने का दुंबा, मेंढ़ा और भेड़:

दुंबा, भेड़, और मेंढ़ा अगर साल से कम हो और कम से कम छे महीने या उससे ज़ियादा का हो, लेकिन इतना सेहत मंद और बड़ा हो कि एक साल का मालूम होता हो, और उस में और एक साल की उम्र वाले दुंबों में फरक़ ना हो सके, तो उनकी कुर्बानी तब भी जाइज़ है-

याद रहे कि ये हुक्म बकरी और बकरे के लिए नहीं है - 

जानवरों की उम्रों में इस्लामी साल का ऐतबार:

जानवरों की उम्रों में असल ऐतबार इस्लामी यानी चांद के साल का है,अंग्रेज़ी साल का ऐतबार नहीं,इसलिए चांद के ऐतबार से उम्र पूरी होना ज़रूरी है भले अंग्रेज़ी साल के ऐतबार से उनकी उम्र कम हो - 

अगर किसी जानवर की उम्र कुर्बानी के दिनों में पूरी हो रही हो, तो उम्र पूरी हो जाने के बाद ही उनकी कुर्बानी जाइज़ है -

 इसी तरह अगर किसी जानवर की उम्र कुर्बानी के तीसरे दिन पूरी हो रही हो तो तीसरे दिन ही कुर्बानी जाइज़ होगी, इससे पहले नहीं -


क़ुर्बानी के जानवरों में कम से कम 2 दांत होने की शर‌ई हैसियत:

क़ुर्बानी का जानवर जब क़ुर्बानी की उम्र को पहुंच जाता है तो आम तौर पर उसके दो दांत निकल आते हैं जो इस बात की निशानी हुआ करती है कि जानवर की क़ुर्बानी की उम्र पूरी हो चुकी है -
( क़ुर्बानी के जानवर और उनकी उम्र के लिए *भाग १३ और 14* देखिए)

लेकिन इसमें यह बात याद रहे कि असल एतबार उम्र का है, दांतो का नहीं, अगर किसी जानवर की उम्र पूरी हो चुकी हो लेकिन उसके दो दांत अभी तक नहीं निकले हों तो ऐसे जानवर की क़ुर्बानी भी जायज़ है-

अगर किसी जानवर के दांत पूरे ना हों लेकिन बेचने वाले का केहना है कि उम्र पूरी हो चुकी है भले ही दांत नहीं निकले हैं और जानवर की ज़ाहिरी हालत भी यही बता रही हो कि उम्र पूरी हो चुकी है, तो ऐसी सूरत में बेचने वाले की बात पर भरोसा करना दुरुस्त है, और अगर हो सके तो ऐसी बातों में किसी माहिर आदमी की राय ले ली जाए ताकि शक ना रहे-



कौन से जानवर में कितने लोग शरीक हो सकते हैं?

❇ बड़े जानवर जैसे ऊंट, ऊंटनी, गाय, बैल, भैंस, भैंसा में एक आदमी से लेकर 7 आदमी तक शरीक हो सकते हैं, चाहे दो हों या तीन हों या चार हों या 5/6 हों लेकिन 7 से ज्यादा लोगों का शरीक होना जायज़ नहीं-

❇ छोटे जानवर जैसे बकरा, बकरी, दुंबा, भेड़, मेंढ़ा  में से हर एक में सिर्फ एक आदमी ही की क़ुर्बानी जायज़ है इसमें एक से ज़्यादा का शरीक होना जायज़ नहीं......


मालदार शख़्स के जानवर के बच्चे का हुक्म

मालदार शख़्स ने क़ुर्बानी के लिए जो जानवर मुतअय्यिन किया था, अगर उस जानवर ने क़ुर्बानी से पहले बच्चे को जन्म दे दिया,तो उस बच्चे की क़ुर्बानी,उस शख़्स पर लाज़िम नहीं ! 

 मालदार शख़्स का क़ुर्बानी के जानवर को बदलना

मालदार शख़्स को इख़्तियार है कि जो जानवर उसने क़ुर्बानी के लिए मुतअय्यिन किया है, वह जानवर क़ुर्बानी से पहले बदलना चाहे तो बदल ले और उसकी जगह दूसरे जानवर की क़ुर्बानी करे! क्यूंकि मालदार शख़्स के मुतअय्यिन करने से क़ुर्बानी का जानवर मुतअय्यिन नहीं होता ; इसलिए उसे बदलने का इख़्तियार रहता है ! 


 फ़क़ीर के जानवर के बच्चे का हुक्म-

फ़क़ीर शख़्स ने जो जानवर क़ुर्बानी के लिए मुतअय्यिन कर रखा था,उसने क़ुर्बानी से पहले बच्चे को जन्म दिया,तो ऐसी सूरत में फ़क़ीर पर जानवर और उसके बच्चे दोनों की क़ुर्बानी लाज़िम है ; क्यूंकि ये जानवर फ़क़ीर की तरफ़ से मन्नत के दर्जे में है,और मन्नत के सब फायदे मन्नत ही के हुक्म में होते हैं,और ज़बह करने के बाद उस बच्चे का गोश्त सदक़ा करना लाज़िम है ! खुद इस्तेमाल करना जाइज़ नहीं ! 

 फ़क़ीर का क़ुर्बानी के जानवर को बदलना

फ़क़ीर शख़्स ने अगर जानवर क़ुर्बानी के लिए कह कर ज़बान से मुतअय्यिन कर लिया ; तो अब उसके लिए बदलने की इजाज़त नहीं  बल्कि इसी मुतअय्यिन जानवर की क़ुर्बानी लाज़िम है !



 
गुमशुदा जानवर बाद में मिल गया
अगर गुमशुदा जानवर बाद में मिल जाए तो उसकी कई सूरतें हैं۔

1- अगर मालदार का जानवर मिला है तो उस पर ख़ास इसी जानवर की क़ुर्बानी लाज़िम नहीं है,बल्कि किसी एक जानवर की क़ुर्बानी वाजिब होने के हिसाब से कर सकता है ! 
2- फ़क़ीर का गुमशुदा जानवर मिल गया और उसने अभी कोई और जानवर क़ुर्बानी की नियत से नहीं ख़रीदा था,तो उस पर सिर्फ़ हासिल शुदा जानवर की क़ुर्बानी लाज़िम है ! 
3- और अगर गुमशुदा के मिलने से पहले फ़क़ीर शख़्स कोई और जानवर ख़रीद चुका था,बाद में गुमशुदा भी मिल गया तो अब उस पर नए ख़रीदे हुए और हासिल होने वाले दोनों जानवरों की क़ुर्बानी लाज़िम है ! 

 नाबालिग़ और मजनून की तरफ़ से क़ुर्बानी                                नाबालिग़ बच्चे और मजनून शख़्स पर क़ुर्बानी वाजिब नहीं है, (अगरचे वो मालदार ही क्यूँ ना हों),इसी तरह उनके औलिया पर भी उनकी तरफ़ से क़ुर्बानी लाज़िम नहीं,लेकिन अगर कर दें, तो बहतर है !           



 अहले ख़ाना और औलाद की तरफ़ से बिना इजाज़त क़ुर्बानी
अगर बाप का मामूल है कि वह हर साल अपने अहले ख़ाना और छोटे बड़े बच्चों  की तरफ़ से  क़ुर्बानी करता है तो सब की तरफ़ से क़ुर्बानी दुरुस्त है !चाहे अहले ख़ाना ने बाक़ायदा इजाज़त दी हो या नहीं दी हो ! 

 क़ुर्बानी करने वाला क़ुर्बानी से पहले वफ़ात पा गया
जिस शख़्स पर क़ुर्बानी वाजिब थी और वो क़ुर्बानी के दिनों में ही वफ़ात पा जाये और अभी उसने क़ुर्बानी भी नहीं की थी तो उससे क़ुर्बानी का वुजूब साक़ित हो जाता है,इसलिए उस पर क़ुर्बानी की वसिययत लाज़िम ना होगी ! 

 क़ुर्बानी के दिनों के बाद वफ़ात पाने पर वसियत लाज़िम है
अगर कोई शख़्स क़ुर्बानी के दिनों के गुज़रने के बाद वफ़ात पा जाये तो, उस पर बकरी की क़ीमत का सदक़ा करना या उसकी वसियत करना लाज़िम है !



 मरने वाले शरीक की क़ुर्बानी
अगर बड़े जानवर में हिस्सा लेने वाले किसी शरीक का क़ुर्बानी से पहले इंतिक़ाल हो जाये और उसके वारिसीन सब आक़िल बालिग़ हों और वो सब उसकी तरफ़ से क़ुर्बानी की इजाज़त दें , तो ये क़ुर्बानी दुरुस्त होगी और अगर तमाम वारिसीन या उनमे से कोई एक वारिस इजाज़त ना दें या तमाम वरिसीन या उनमें से कोई एक वारिस नाबालिग़ या ग़ैर आक़िल हो तो ऐसी सूरत में अगर मय्यित का हिस्सा लगा दिया गया  तो उस जानवर में शरीक किसी भी हिस्सेदार की क़ुर्बानी दुरुस्त ना होगी;क्यूंकि मय्यित का हिस्सा क़ुरबत ना रहेगा ! 

 बग़ैर वसियत मय्यित की तरफ़ से क़ुर्बानी
अगर कोई शख़्स अपने मरहूम अज़ीज़ों की तरफ़ से नफ़ली  क़ुर्बानी करे तो इसमें कोई हर्ज नहीं है,और ये सिलसिला उम्मत में बग़ैर किसी इख्तिलाफ के जारी व सारी है !और इस तरह की क़ुर्बानी का गोश्त कोई भी खा  सकता है!इसमें फ़क़ीर या ग़रीब की क़ैद नहीं ! 

 हुज़ूर (स•अ• व• ) की तरफ़ से क़ुर्बानी
अगर कोई शख़्स अपनी तरफ़ से हुज़ूर (स•अ• व• ) की जानिब से क़ुर्बानी करता है,तो इसमें कोई हर्ज नहीं बल्कि ये सआदत के हुसूल का ज़रीआ है 



Tuesday, June 30, 2020

केला खाने के फायदे Kela khane ke fayde Banana benefits



दोस्तों केला बरसात की मौसम  मे हरजगह आसानी से मीलने वाला फल हैं
      केले की गिनती चुनिंदा स्वादिष्ट और गुणकारी फलों में की जाती है केला ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है 
      केले में थायमिन रीबोफ्लावीन नियासिन फोलिक एसिड विटामिन A और विटामिन B काफी मात्रा में पाया जाता है 
       तो चलिए जानते हैं केले खानेके फायदे के बारे में 
     दुबले पतले लोगों को वजन बढ़ाने तथा ताकत के लिए रोजाना सुबह 3 4 केले दुध के साथ लेनेसे वजन बढने के साथ साथ शरीर ताकतवर बनता है। 
     केले  को दही में मिलाकर रोज़ाना खाली पेट खाने से वीर्य गाढ़ा होकर योन शक्ति बढजाती है 
    केला  खाने से हड्डियाँ मजबूत बनती हैं क्यों के केलेमे कैल्शियम और मैग्नीशियम काफी मात्रा में पाया जाता है 
    खाना खाने के बाद रोजाना केला खाया जाये तो खाना आसानी से पचजाता है जीस्से गेस कब्ज की तकलीफ नही होती है क्योंकि केलेमे फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं 
    जीन लोगुंको एनीमिया  यानी शरीर मे खुन की कमी रहती हो उनको केला खाने से खुन की कमी दुर होजाती है क्योंकि केलेमे आयरन पाया जाता है 
      दील और ब्लडप्रेशर के मरीजों के लिए केला बहुत ही फायदेमंद है क्योंकि केलेमे पोटेशियम पाया जाता है जो हार्ट अटैक से बचाता है और ब्लडप्रेशर को कंट्रोल में रखता है। 
     केला खाने से याददाश्त बनी रहती है क्योंकि  केले में विटामिन B6 पाया जाता है जो नीर्वस सिस्टम को ठीक रखता है 

Wednesday, June 10, 2020

मछली हलाल क्यूँ है जबकि वह ज़िबह नहीं की जाती ? Machhli Halal kyun Jabki vo halal nahi ki jati ?

मछली हलाल क्यूँ है जबकि वह ज़िबह नहीं की जाती ?

 विज्ञान ने गैर मुसलमानों के सबसे बड़े सवाल का जवाब दे दिया

       इस्लाम ने हलाल खाने का हुक्म  देते हुए हराम खाने  से मना किया है और ऐसे जानवर का गोश्त का उपयोग करने के लिए हुक्म  दिया है जिसे इस्लामी तरीके से ज़िबह किया गया हो।

      झटके से मारे गए जानवर का गोश्त इस्लाम में हराम है
गैर मुस्लिम  इस्लाम के इस हुक्म के  मुताल्लिक  मछली के बारे मे सवाल करते हैं कि उसे ज़िबह नहीं किया जाता तो यह कैसे हलाल हो गई

      लेकिन अब विज्ञान ने इस सवाल का जवाब दे दिया है और ऐसा आश्चर्यजनक खुलासा किया है! अल्लाह ने दुनिया में मौजूद हर शै को सही तरीके से बनाया है और ऐसा ही मामला मछली के साथ भी है वो  जैसे ही पानी से बाहर आती है तो उसके शरीर में मौजूद सभी रक्त तुरंत अपना रास्ता बदल लेता है और मछली के मुंह में इकठ्ठा होकर " एपीगलोटस" में जमा होना शुरू हो जाता है।

      मछली के पानी से निकलने के कुछ ही देर बाद उसके शरीर में मौजूद रक्त एक एक बूंद एपीगलोटस में जमा हो जाता है और उसका  गोश्त पाक और हलाल रहता है और यही कारण है कि मछली ज़िबह  करने की जरूरत ही पेश नहीं आती  और जिस दौरान मछली का गोश्त बनाया जाता है तो " एपीगलोटस"को बाहर निकाल दिया जाता है।
        यही नहीं विज्ञान ने इस्लाम में हलाल भोजन के हुक्म  के पीछे छिपे तथ्य को भी प्रकट किया है जिससे गैर मुस्लिम भी हक्का-बक्का रह गए हैं क्योंकि जब किसी जानवर को ज़िबह किया जाता है तो उसके दिल और दिमाग का संपर्क समाप्त नहीं होता और दिल जानवर की वाहिकाओं और धमनियों में मौजूद सभी रक्त बाहर निकलने तक धड़कता रहता है और इस तरह उसका गोश्त खून से पाक और हलाल हो जाता है।

        दूसरी ओर जब किसी जानवर को गैर इस्लामी तरीके से  यानी "झटके"  से मार दिया जाता है तो उसका दिल भी तुरंत धड़कन बंद कर देता है और इस प्रकार शरीर से खून निकल ही नहीं पाता। वैज्ञानिकों का मानना है कि विभिन्न प्रकार के गंभीर रोग पैदा करने वाले जरासीमों और बैक्टरियाज़ के  प्रजनन के लिए रक्त बहुत अच्छा माध्यम है और जब जानवर के शरीर से खून निकल ही नहीं पाता तो यह गोश्त ही खराब कर देता है और जब इंसान उसे खाता हैं तो कई बीमारियों से पीड़ित हो जाता हैं।
याद रखिये ज़िबह किये हुए गोश्त की फ्रिज लाइफ झटके के गोश्त से कहीं ज़्यादा होती है। इसीलिए कहा जाता है के इस्लाम 100 परसेंट एक प्राकृतिक तथा वैज्ञानिक धर्म है।

        इस्लाम पूरी दुनिया के लिए सही मज़हब है.क्योंकि वह एक ईश्वर को पूजने का हुक्म देता है.और इस्लाम के  नियम ईश्वर ने ख़ुद बनाए है अपने बंदो के लिए, आज साइंस इस्लाम के हर नियम पर रिसर्च कर रहा है, और संतुष्ट भी हो रहा है,.?

Thursday, May 14, 2020

Happy EidulFitra Eid Mubarak Status images pictures 2020

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    रमजान इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना है। इस्लाम मे  चांद कैलेंडर का उपयोग होता है  यानी हर महीने की शुरुआत नए चांद के देखने से होती है। क्युं की चांद कैलेंडर सुरज कैलेंडर की तुलना में लगभग 11 दिन छोटा होता है, दुनिया भर में 180 करोड से ज्यादा मुसलमान इस महीने में रोजा (उपवास) करते हैं यानी अल्लाह की इबादत के लिए खाने  पीने के साथ साथ दुनिया के बीन जरूरी कामों को छोडदेते हैं   इस रमजान के महीने में मुसलमान पवित्र किताब यानी कुरान को जीयादा पढते हैं और रात को तरावी मे पुरे महीने में पुरे कुरान को पुरा करते हैं 

ईदुल फित्र दीन का त्योहार 

     जब मुसलमान पुरे महीने के रोजे पुरे करते हैं तो रमजान की आखिरी रात को चांद देखकर ईद के दिन का फैसला होता है.तो अल्लाह मुसलमानों को इनाम देते हैं जीसको इदुलफित्र कहते है इदुलफित्र के दीन मुसलमान छोटे छोटे गांव से जाकर शहरों मे जमा होते हैं वहां ईदगाह और बड़ी मस्जिदों में इद की नमाज पढते हैं नमाज के बाद मुसलमान एक-दूसरे की मुलाकात करते हैं     ऐसे में लोग एक-दूसरे के घर ईद पर जाते हैं और एक-दूसरे को ईद की बधाई देते हैं। लेकिन जो लोग दूसरे शहरों में या दोस्तों से दूर रहते हैं, वे भी सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देते हैं। अगर आप भी अपने दोस्तों को ईद की मुबारकबाद भेजना चाहते हैं या whatsapp पर स्टेटस लगाने के लिए इद मुबारक इमेज लगाना चाहते हैं तो आज हम आपको ईद के लिए खास इमेज दिखा रहे हैं, जिन्हें आप अपने whatsapp स्टेटस के लिए डाउनलोड कर सकते हैं।


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चेचन्या जहा सबसे खुबसूरत इलाका खुबसूरत लड़कियां और बहादुर कोम रहती हैं





दोस्तों, आज मैं आपको दुनिया के सबसे खूबसूरत लोग और सबसे खूबसूरत इलाके यानी चेचन्या के बारे में इस पोस्ट में बताने वाला हुं।

     हमने सैकड़ों जिन और परियों की कहानियां सुनी हैं जिनमें कोहे काफ के नाम का जिक्र हमेशा होता है, यानी जिन्नों और परियों का देश। लेकिन दोस्तों, यह जन्नत जैसा टुकड़ा यानी चेचन्या, दुनिया के सबसे खूबसूरत इलाकों में से एक है, जहाँ इसकी सुंदरता के अलावा, इसके निवासियों के अपने नैतिकता और ईमानदारी के नजरिए में इसका अपना उदाहरण है। चेचन्या इस्लामी परंपराओं वाला एक देश है। एक तरह से, चेचन्या को दशकों तक बदकिस्मत कहा जा सकता है आजादी के लिए लड़ने के बावजूद, इस क्षेत्र में अभी भी पूर्ण स्वतंत्रता की कमी है। चेचन्या का पूरा और आधिकारिक नाम चेचन्या गणराज्य है। चेचन्या की जनसंख्या 1436000 है। चेचन्या का क्षेत्रफल 17,300 वर्ग किलोमीटर है। यह दुनिया का 75 वां सबसे बड़ा देश है। इसकी राजधानी ग्रोज़नी है। चेचन्या की 32 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है। देश के झंडे में तीन रंग शामिल हैं: हरा, सफेद और लाल।  जिसमें हरा रंग मुसलमान होने सफेद रंग अमन शान्ति और सुर्ख रंग उन शहीदों की याद दिलाती है जिन्होंने आजादी के लिए अपना बलिदान दिया था

      चेचन्या की सरहदें  जॉर्जिया अंगोस्तीया दागेस्तान रूस से मिलती है और एक सरहद बहरी कोजबीन से मिलती है। 

     देश के वर्तमान राष्ट्रपति रमजान कदुरो हैं। राष्ट्रपति का चुनाव यहां चार साल के लिए किया जाता है।

     यह क्षेत्र आंशिक रूप से मध्य यूरोप में स्थित है। चेचन्या को मुख्य रूप से किसी भी जिले में नहीं बांटा गया है, लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती हैं। चेचन्या में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाएं चेचन और रूसी हैं। अन्य छोटी भाषाएँ भी बोली जाती हैं

     देश की 95.3 प्रतिशत आबादी में से 75 प्रतिशत चेचन वंश के हैं, और शेष 4.7 प्रतिशत में रूसी प्रतिबद्ध अनश और अन्य छोटे जातीय समूह शामिल हैं। कुछ रूसी स्रोतों के अनुसार, 1994 में हिंसा में हजारों लोग मारे गए थे। यूक्रेनी आर्मेनियाई और चीनी देश छोड़ गये थे 

     इस्लाम देश का सबसे बड़ा धर्म है देश की आबादी का पचहत्तर प्रतिशत सुन्नी मुसलमान हैं जो इमाम शाफीई का अनुसरण करते हैं। अन्य संप्रदायों में कादरी और नक्शबंदी शामिल हैं लेकिन सबसे अधिक आबादी वाले शाफी और हनफ़ी हैं  अन्य धर्मों की बहुत कम संख्या है लाफ्टर के अनुसार, 2015 में मुस्लिम ग्रोजनी में एक निन्दात्मक फिल्म का विरोध प्रदर्शन हुवा था जिसमें  लगभग 350,000 से 500,000 लोग जमा हुये थे 

     चेचन्या में शादी मे दूल्हा एक तीन-टुकड़ा पैंट कोट पहनता है, जबकि दुल्हन एक सफेद पोशाक पहनती है। यहां एक अजीब रिवाज यह है कि शादी के बाद, दूल्हा अपने ससुराल वालों से नहीं मिलता है और जब तक पेहला बच्चा पैदा नहीं होता है तब तक दुल्हन अपने ससुराल वालों से नहीं मिलती है। 

     यहां की जामा मस्जिद को देश के दिल के रूप में मानाजाता है। यह मस्जिद देश में सबसे बड़ी है। पहले लोकतांत्रिक नेता के आगमन की याद में बनाइ गइ हैं , 

     कोहे काफ का विशाल विस्तार भी उसी देश में स्थित है। यह पर्वत श्रृंखला एशिया और यूरोप के बीच जुदाई की रेखा खींचती है। जब बर्फ यहां के ग्लेशियरों की ओर पिघलती है, तो यह दृश्य दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है और दुनिया भर से हजारों पर्यटक इन दृश्यों का आनंद लेने के लिए आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह ग्लेशियर बहुत लंबा और उजाड़ है। इन पहाड़ों को पूरी तरह से नहीं देख पाया है 

     चेचन्या में वार्षिक पारंपरिक भोजन उत्सव मनाते हैं, जिसे शाह सिल्क फूड फेस्टिवल कहा जाता है, जो सबसे उत्साही और भोजन-प्रेमी लोगों के लिए एक उत्सव का अवसर है। इस त्योहार में किसी भी छोटे जानवर को पूरी तरह से भुना जाता है। इस त्योहार का आयोजन पूरे देश में किया जाता है। राष्ट्रपति इन कार्यक्रमों में जाते हैं और आम लोगों से मिलते हैं। इस दौरान, लोग सुंदर गाने और नृत्य भी करते हैं। युवा लड़कियां अपनी सुंदरता और युवावस्था के कारण मॉडलिंग करना पसंद करती हैं। और इसकी विशाल सुंदरता के कारण, यह किसी को भी आकर्षित कर सकती है, लेकिन इन मॉडल शो में, अश्लील कपड़ों के बजाय, हिजाब और पूरे शरीर को सुंदर कपड़ों से ढंका जाता है, जो यहां अच्छी और स्वच्छ संस्कृति को बनाए रखने का एक अमूल्य हिस्सा है। 

      एशिया और यूरोप के बीच तेल पाइपलाइनें इसी क्षेत्र से गुजरती हैं। कारण यह है कि रूस किसी भी परिस्थिति में इस क्षेत्र को अपने हाथों से बाहर जाने की अनुमति नहीं देता है। चेचेन को इस संबंध में सबसे अमीर क्षेत्र माना जाता है क्योंकि यहां लगभग 15,000 तेल रिफाइनरियां हैं। एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण से, रूस। अपने नियंत्रित मे लेने के लिए, उन्होंने चालीस साल तक जुल्म का बाजार गर्म रखा और 1875 में रूस ने इस क्षेत्र को अपना क्षेत्र घोषित कर दिया। 1870 से 1920 तक चेचन्या कभी रूसी कब्जे में था। और एक बार यहां आने वाले क्रांतिकारियों से जुड़े होने के बाद, इसने 1924 में सोवियत संघ ने कब्जा कर लिया। और दुसरे विश्व युद्ध के दौरान, जब जर्मन सेना ग्रोज़नी पहुंची, चेचन्या के योद्धाओं ने रूसी तानाशाह जोसेफ के खिलाफ अपनी आवाज उठा लिया। 

       1991 में लाखों मुस्लिमों का नरसंहार किया गया जब अन्य बाल्टिक राज्यों ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। वही चेचन लोगों ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की, लेकिन रूस ने उस स्वतंत्रता को मान्यता नहीं दी और दागेस्तान से चेचन्या पर आक्रमण किया। रूस ने सोचा था कि वह अपनी विशाल सेना की ताकत से चेचन्या को कबजा हासिल करेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ, और एक महीने की भीषण लड़ाई के बावजूद, रूसी सेना चेचन राजधानी ग्रोज़्नी पर कब्जा करने में असमर्थ रही। 

      1990 में, रूसी सैनिकों ने चेचन राजधानी ग्रोज़नी में फिर से प्रवेश किया, लेकिन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निकाय रूस पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाया गया और उसने अपने सैनिकों की तत्काल वापसी का आह्वान किया रूस ने 2001 में चेचन्या को  निशाना बनाया था । ऐसा कहा जाता है कि 2000 और 2008 के बीच। कई कब्रों की खोज की गई जिसमें हजारों लोगों को एक साथ दफनाया गया था  

       चेचेन की रोजगार का मुख्य स्रोत खेती भेड़ और घोड़े पालना हैं।

      रूस ने चेचन्या पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए और चेचन्या के सभी व्यापार मार्गों को बंद कर दिया चेचन्या की छह वर्षों में बेरोजगारी दर 67% थी, लेकिन वर्तमान राष्ट्रपति के अंथक प्रयासों की बदौलत, चेचन्या की आर्थिक वृद्धि तेजी से बढ़ी है और 2014 के एक रिपोर्ट के अनुसार रोजगार के स्रोतों की एक विस्तृत श्रृंखला बनाई है। रोजगार की दर केवल 21.5% है। 

      वहा की करंसी को रूबल कहा जाता है। 

      चेचन्या एक हल्की जलवायु वाला एक क्षेत्र है, लेकिन सर्दियों में यह पहाड़ों में बरफ बारी होती है, जीस्की वजासे गंभीर ठंड का कारण बनता है। 

     देश का सबसे बड़ा और सबसे ऊंचा पहाड़ अल ब्रुज़ और काजबिक हैं। इन पहाड़ों की ऊंचाई पांच हजार छह सौ बयालीस और पांच हजार तैंतीस फीट हैं । 

      चेचन्या में कई प्राकृतिक झरने हैं जहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। यदि आप चेचन्या की यात्रा करना चाहते हैं, तो आपको रूसी सरकार से अनुमति लेनी होगी। आपके पास एक साल का पासपोर्ट होना चाहिए और आप इसे रूसी वीजा वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। आप अब दिल्ली में रूसी दूतावास से भी संपर्क कर सकते हैं। चेचन्या जानेके लीये सड़क, रेलवे और हवाई अड्डे हैं। रूसी शहरों से ग्रोज़मी के लिए दैनिक उड़ानें हैं।

       चेचन मे यमी मीट परोसा जाता है। नूडल्स सबसे पसंदीदा व्यंजन माना जाता है। चेचन राष्ट्रीय पशु ग्रे वुल्फ है। यह थी चेचन्या की कुच जानकारी।

कॉमेंट करके जरूर बताना आप को यह जानकारी कैसी लगी। 

Sunday, May 3, 2020

رمضان المبارک میں ستر ہزار کلمہ پڑھ کر ایصالِ ثواب کرنے کی فضیلت


رمضان المبارک میں ستر ہزار کلمہ پڑھ کر ایصالِ ثواب کرنے کی فضیلت 
ملا علی قاری ؒ نے مرقاۃ شرح مشکوٰۃ میں الشیخ محی الدین ابن العربی ؒ کے حوالے سے یہ حدیث نقل کی ہے کہ حضور ﷺ نے فرمایا کہ:   مَنْ قَالَ لَا اِلٰہَ اِلَّا اللّٰہْ سَبْعِیْنَ اَلْفًا غُفِرَ لَہٗ ط   جس شخص نے ستر ہزار مرتبہ لَااِلٰہ اِلَّااللّٰہُ پڑھا ، اس کی مغفرت کردی جاتی ہے۔ اور اس حدیث کو ذکر کرنے کے بعد نقل فرمایا ہے کہ وَمَنْ قِیْلَ لَہٗ غُفِرَلَہٗ اَیْضاً اور کسی کو پڑھ کر ایصالِ ثواب کردیا جائے تو اس کی بھی مغفرت کردی جاتی ہے۔ اور دلیل میں یہ واقعہ نقل کی ہے کہ اُن کی خدمت میں ایک جوان آیا جو ولی اللہ تھا، کَانَ مَشْھُوْرًا بِالْکَشْف، اس کا کشف مشہور تھا، اس نے اچانک رونا شروع کردیا۔ شیخ ابن عربی نے پوچھا! مَا حَضَرَ بِبُکَا ئٍ، اے جوان کیوں روتا ہے؟ اس نے کہا ، انِّی اَراٰی اُمّیْ فِی الْعَذَابِ، میں اپنی ماں کو عذاب میں دیکھ رہا ہوں۔ شیخ ابن عربی  ؒ فرماتے ہیں   فَوھَبْتُ لَاُمِّہٖ ، میں نے اس کی ماں کو ستر ہزار لَااِلٰہ اِلَّااللّٰہُ  کا ثواب ہدیہ کردیا اور دل میں اللہ سے بات کی کہ اے اللہ !  یہ جو میں نے ستر ہزار  لَااِلٰہ اِلَّااللّٰہُ پڑھا ہے اور ابھی تک کسی کو ایصالِ ثوات نہیں کیا یہ اس جوان اللہ والے کی ماں کو عطا رکردے۔  فَضَحِکَ الشَّابُّ، بس وہ جو ان ہنسا حالانکہ شیخ کی زبان ابھی ہلی نہیں تھی، دل میں اللہ تعالیٰ سے سودا کیا تھا لیکن چونکہ اس جوان کا کشف بہت مشہور تھا تو وہ فوراً ہنسا۔ شیخ نے پوچھا لَااِلٰہ  مَاھٰذا الضِّحْکُ،کیو ں ہنستے ہو؟ اس نے کہا ! اِنِّیْ اَرٰی اُمِّیْ فِیْ حُسْنِ الْمَآبِ،میں اپنی ماں کو جنت میں دیکھ رہا ہوں۔ شیخ فرماتے ہیں : لَا فَعَلِمَتْ صِحَّۃَ ھٰذَا الْحَدِیْثِ بِصِحَّۃِ کَشْفِہٖ وَصِحَّۃَ کَشْفِہٖ بِصِحَّۃِ ھٰذَا الْحَدِیْث، میں نے اس حدیث کی صحت کو اس جوان کے کشف سے اور اس کے کشف کی صحت کو اس حدیث کی صحت سے دیکھ لیا، حدیث پر تو یقین پہلے ہی تھا لیکن اب اور بڑھ گیا ۔ اس لئے عرض کرتا ہوں کہ زندگی چند دن کی ہے۔ تو روزانہ لَااِلٰہ اِلَّااللّٰہُ کی پانچ تسبیح پڑھ لیجئے، یہ پچیس منٹ میں پوری ہوجائیں گی۔ درمیان میں ، مُحَمَّدُ رَّسُوْلُ اللّٰہِ پڑھ لیجئے اور جب لَااِلٰہ اِلَّااللّٰہُ شروع کیجئے تو یہ مراقبہ کیجئے کہ میری لَااِلٰہ اِلَّااللّٰہُ عرشِ اعظم تک جارہی ہے ، کیونکہ بشارت دینے والے سید الانبیاء ﷺ ہیں جو صادق المصدوق ہیں، اصدق القائلین ہیں، ان سے بڑھ کر کون سچا ہوگا؟ ان کی بشار ت ہے کہ جب بندہ  لَااِلٰہ اِلَّااللّٰہُ پڑھتا ہے تو  لَااِلٰہ اِلَّااللّٰہُ لَیْسَ لَھَا حِجَابٌ دُوْنَ اللّٰہِ، اللہ تعالیٰ میں اور لَااِلٰہ اِلَّااللّٰہُ  میں کوئی حجاب نہیں۔ جب یہ تصور ہوگا کہ میری ہر لَااِلٰہ اِلَّااللّٰہُ ،عرشِ اعظم تک جارہی ہے، اللہ تعالیٰ سے ملاقات کررہی ہے تو بتائیے  مزہ آئے گا یا نہیں؟  ہر پانچ ماہ بعد اپنے پیارے رشتہ داروں کو والدہ، والد، اولاد ، دادا دادی نانا نانی کو ستر ہزار مرتبہ کلمہ بخش سکتے ہیں 

पपीता खाने के दमदार फायदे और नुकसान


   पपीता एक आसानी से पचने वाला फल है। पपीता एक बहुत ही स्वादिष्ट सेहतमंद फल है, पपीता भूख और शक्ति बढ़ाता है।पपीता दिल को स्वस्थ रखता है यह तिल्ली, यकृत और पीलिया जैसी बीमारियों को ठीक करता है। पेट की बीमारियों को ठीक करने में पपीता खाना फायदेमंद है। पपीता खाने से पाचन तंत्र में सुधार होता है। पपीते का रस अनिद्रा, सिरदर्द, कब्ज और अन्य रोगों को ठीक करता है। पपीते का जूस पीने से एसिडिटी (खट्टी डकारें आना) खत्म हो जाती हैं। पपीता पेट की बीमारियों, दिल की बीमारियों, आंतों की कमजोरी आदि को ठीक करता है।इसमें बहुत सारे औषधीय गुण होते हैं जो बहुत सारे स्वास्थ्य लाभ पहुंचाते हैं कच्चे पपीते की सब्जी खाना पेट के लिए फायदेमंद होता है।पके पपीते की तुलना में कच्चा पपीता स्वास्थ्य के लिए अधिक फायदेमंद है। यह विटामिन ए से भरपूर होता है।हाई ब्लड प्रेशर में पपीते की पत्तियों का इस्तेमाल फायदेमंद है यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखता है।

     यह बीटा कैरोटीन जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो आपको लंबे समय तक जवान बने रहने में मदद कर सकता है। पपीते का सेवन पेट के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। अगर आप अपने पेट को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो अपने आहार में पपीते को नियमित रूप से शामिल करें।हम आपको पपीते के कुछ फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।

1. कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारियों का मुख्य कारण है। जब हृदय की रक्त वाहिकाओं में कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाता है, तो दिल से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पपीता फाइबर, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो रक्त वाहिकाओं में कोलेस्ट्रॉल को जमा होने से रोकता है जो हृदय को स्वस्थ रखता है।

2. आजकल लोग फास्ट फूड का सेवन करना पसंद करते हैं, यह पेट के लिए बहुत हानिकारक होते हैं, इनका सेवन आपके पाचन तंत्र को खराब कर देता है। लेकिन अगर आप नियमित रूप से पपीते का सेवन करते हैं, तो यह आपके पेट को हमेशा स्वस्थ रख सकता है, पपीता पाचन एंजाइमों से भरपूर होता है। इसके अलावा, इसमें कई तरह के फाइबर होते हैं जो सही पाचन क्रिया को बनाए रखने में मदद करते हैं, इसके खाने से कब्ज की समस्या से भी छुटकारा मिलता है।

3.पपीता वीर्य को बढ़ाता है, पागलपन को खत्म करता है और मुंह के घावों को खत्म करता है। इसे खाने से घाव ठीक होते हैं और दस्त को रोकने मे मदद करता है और पेशाब की रुकावट से राहत मिलती है। कच्चे पपीता का दूध त्वचा रोगों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

4.पपीते के बीज कीड़ों को मारता हैं और मासिक धर्म को नियमित करता हैं। पपीता महिलाओं के स्तन के दूध को बढ़ाता है।

5.पपीता पाउडर पीने से पेट की जलन, घाव, ट्यूमर और अपच ठीक हो जाता है।

6.पका पपीता पाचन शक्ति बढ़ाता है, भूख बढ़ाता है, अधिक पेशाब लाता है, मूत्राशय के रोगों को खत्म करता है, पथरी को खत्म करता है और मोटापे को खत्म करता है। पपीता बलगम के साथ रक्त आने को रोकता है और खुनी बवासीर को रोकता है।

हानिकारक:

गर्भावस्था के दौरान और जिन महिलाओं को मासिक धर्म अधिक आता हो उन्हें कच्चा या पका पपीता नहीं खाना चाहिए। कच्चा पपीता बवासीर के रोगियों के लिए हानिकारक है। पपीते के बीज के उपयोग से गर्भपात हो सकता है।



Saturday, May 2, 2020

आँखों की रोशनी बढ़ाएं और इस चमत्कारी दवा से 15 साल जवानी लोट आयेगी




     आँखों की रोशनी बढ़ाने और आंखों के आस-पास की स्किन को पुनर्जीवित करने का उपचार बहुत ही आसान है, तमाम चीजें आपकी रसोई घर में मिलेंगी और इसे बनाने का तरीका बहुत सरल है।
इस दवा के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से सुरक्षित है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है क्योंकि यह कुदरती तत्वो से बना है।

     और इस दवा को बनाने के लिए, आपकी जेब से अधिक खर्चा नहीं होगा क्योंकि यह बहुत कम कीमत पर बनाया गया है।

      रोजाना उपयोग के साथ, आंखों के आसपास की त्वचा नरम और कोमल हो जाती है और इसके अलावा, आपके बाल बेहतर हो जाएंगे और बालों का झड़ना कम होगा।
     एक बार इसका उपयोग करें क्योंकि यह आपका इस्मे कुछ भी खर्च नहीं होगा लेकिन स्वास्थ्य के लीये कीमती हैं।

तैयार करने के लिए सामग्री:

लहसुन की 3 कली

10 बड़े चम्मच शुद्ध शहद

200 ग्राम अलसी का तेल

4 नींबू

बनाने का तरीका

सबसे पहले लहसुन को छीलकर पीसले। नींबू के रस को एक कांच के जार में रखे इस जार में पीसाहुवा लहसुन, शहद और अलसी के तेल को डालकर अच्छी तरह से लकड़ी के चम्मच से अच्छी तरह से मिलालें। आपकी दवा तैयार है। इसे खाने से पहले दिन में 3 बार एक चम्मच लें। इसे त्वचा पर न लगाएं।

यह चमत्कारी दवा आपकी आंखों की रोशनी बढ़ाने के साथ-साथ आपके चेहरे को खुबसूरत बनायेगा और आपका चेहरा युवान दिखने लगेगा। आप इस दवा का परिणाम देखकर दंग रहजाओगे।

Thursday, April 30, 2020

सुबह खाली पेट जौ का पानी पीने से पेट और कमर की चर्बी खत्म होजाती है



     जौ एक प्रकार का अनाज है जौ आकार में गेहूँ की तरह दिखता है। जौ गेहूं से हल्का है। इसमें लैक्टिक एसिड, सैलिसिलिक एसिड, फॉस्फोरिक एसिड, पोटेशियम और कैल्शियम शामिल हैं। अगर आपके पेट में बहुत अधिक चर्बी जमा हो गई है, तो जौ का पानी पीना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। जौ का पानी पीने से आपके पेट की चर्बी कम होती है। इस पोस्ट में विस्तार से जानें कि जौ का पानी चर्बी को कैसे कम करता है।

    जौ की रोटी को अक्सर डायबीटीज वाले लोगों के लिए अच्छा माना जाता है। डायबिटीज वाले लोगों के शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इस तरह की बीमारियों के अलावा, कई अन्य बीमारियां हैं जिनमें जौ हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। और जौ हमारे शरीर को इन बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है। विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, सेलेनियम, जिंक, तांबा, प्रोटीन, अमीनो एसिड,फाइबर सहित विभिन्न प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर पाए जाते हैं। जौ हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। हम इसका उपयोग अनाज के रूप में करते हैं, और यदि इसका उपयोग पानी के साथ किया जाये तो यह हमारे शरीर को बहुत सारे लाभ देता है। यह हमें कई बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है।

जौ का पानी कैसे तैयार करें:
इसके लिए, कुछ मात्रा में जौ (100-250 ग्राम) लें और इसे अच्छी तरह से साफ करें और फिर इसे लगभग चार घंटे के लिए पानी में भिगोकर छोड़ दें। फिर इस पानी को तीन से चार कप पानी में मिलाएं और कम से कम 45 मिनट तक उबालें। इसके बाद गैस बंद कर दें और इसे ठंडा होने दें। जब यह ठंडा हो जाए, तो इसे एक बोतल में भर लें और इसे पीने के पानी के लिए उपयोग करें, यह एक दिन का उपयोग है, यह प्रक्रिया रोजाना करे फायदेमंद होगी। जो लोग मोटे हैं, कृपया जंक फूड छोड़ दें।
जौ को अनाज के रुप खाने के साथ-साथ उसका पानी पीने के क्या क्या फायदे हैं जाने

1. मोटापा, पेट और कमर की चर्बी को कम करता है
जौ वजन मोटापे से संबंधित समस्याओं में बहुत उपयोगी है। इसमें ऐसे तत्व होते हैं। जिसके सेवन से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। जौ मोटापा कम करने में उपयोगी है, जिससे आप पतले दिख सकते हैं।
मोटापा कैसे कम करता हैं
 जौ घुलनशील और अघुलनशील फाइबर का स्रोत है। इस गुण के कारण, आप लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस करते हैं। दो लीटर पानी में दो बड़े चम्मच जौ उबालें। उबालते समय ढक्कन को अच्छी तरह से ढक दें ताकि जौ के दाने अच्छे से पक जाएं। जब यह मिश्रण हल्का गुलाबी पारदर्शी मिश्रण बनजाये तो पीने के लिए तैयार है , तो रोज इसे छानकर पीये। आप नींबू, शहद और नमक भी मिला सकते हैं। छिलके वाले चीज में फाइबर ज्यादा होता है और पकाने में टाइम ज्यादा लगता है इसलिए बिना छिलके वाली चीज पकाने में आसान होती हैं। और जौ-चने के आटे की रोटी को खाने से भी पेट कमर और सारे शरीर का मोटापा कम हो जाता है।

2.पेट की चर्बी को कम करेगा 
इस मिश्रण को पीने से पेट की चर्बी को कम करेगा और साथ ही डीहाइड्रेशन की समस्‍या भी नहीं होगी  यह यूरीनरी इंफेक्‍शन और कब्ज़ से छुटकारा दिलाता है। इस अनाज में मुत्र बढाने का गुण होता है जो शरीर में विषाक्त पदार्थों के साथ-साथ अतिरिक्त पानी को निकालता है।

3.हृदय रोगों में
इसमें पाया जाने वाला तत्व कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सही रखता है। जिसकी वजह से आपको किसी भी तरह की दिल की बीमारी नहीं होगी। कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होना हृदय रोग का एक प्रमुख कारण है। 

4. रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत बना ता है
इसमें ऐसे तत्व होते हैं। जो आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालता है। ताकि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है । इसके अलावा आपकी त्वचा में चमक भी आती है।

5. पेट में जलन
गर्मी के मौसम में जौ के पानी पीने से पेट मे ठंडक मील्ती है। अगर आपने मसालेदार खाना खाया है, जिससे पेटमे जलन होती हो तो जौ का पानी पीना चाहिए, जो पेट की जलन में बहुत आराम मिलता है।

6. पैरों की सूजन
गर्भावस्था की हालत में महिलाओं के पैरों में सूजन होजाती है। जौ के पानी से सूजन संबंधित तकलीफों से छुटकारा मिलता है।

7. मूत्र संबंधी समस्याएं
अगर आपको किसी भी तरह की मूत्र संबंधी समस्या है तो जौ के पानी का उपयोग करना बहुत फायदेमंद होता है। इससे आपकी मूत्र संबंधी समस्याएं  नही होती 

Monday, April 27, 2020

गुड खाने से क्या फायदे मिलते है जानकर आप हेरान रह जाओगे




आज बात करंगे गुड खाने के फायदे के बारे में जीन लोगोको गूड खाने के फायदे नही जानते वह इस पोस्ट मे गुड खाने से क्या क्या लाभ मीलते है जाने इस पोस्ट  में

खाना खाने के बाद कइ लोगों को पेट में  गेस बनती है तो  खाना खाकर 20 - 30 ग्राम गुड़ खाया जाये तो गैस की तकलीफ नही होती है

 खाना खाने से पहले या बादमें अक्सर लोगों को मीठी चीज खाने का दील करता हैं।तो सबसे बेहतर है कि खाना खाकर आप गुड़ खाएं। गुड़ को खाने के खाया जाए तो आप का शरीर स्वस्थ आैर हेल्दी रह सकते हैं

 खाना खाने के बाद अगर गुड खाये तो पाचन क्रिया को सही रखने के साथ-साथ खाना भी पचजाता है

गुड़ खाने से शरीर में खुन की कमी दूर करके खुन को साफ करता है और हाजमे को ठीक करता है। रोजाना एक गिलास पानी या दूध के साथ 20 ग्राम गुड़ खानेसे पेट को ठंडक जरूर मील्ती है। इससे गैस की तकलीफ नहीं होती। जिन लोगों को गैस की परेशानी है,  वो रोज़ खाना खाने के बाद थोड़ा गुड़ ज़रुर खाया करे

 जीन लोगोका को  खुन की कमी है उनको गुड खाना चाहिए क्योंकि गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है। इसलिए यह खुन की कमी के मरीज़ों के लिए बहुत ही फायदेमंद है खासतौर से महिलाओं को खुन की कमी की शिकायत जीयादा होती है तो उन महिलाओं के लिए गुड का खाना बहुत अधिक फायदेमंद है.
 जीन लोगोको त्वचा खराब है बो गुड खाये क्योंकि  गुड़ खुन से खराब टॉक्सिन साफ करता है, जिससे त्वचा चमकने लगती है और मुहांसे कील काले धब्बे की समस्या नहीं होती है।

 गुड़ की तासीर गर्म होती है, इसलिए गुड के सेवन करनेसे  जुकाम और कफ की तकलीफ दुरकरके इस्से आराम दिलाता है। जुकाम व कफ की वजासे अगर आप कच्चा गुड़ पसंद नही तो गुड की चाय बनाकर पीये या गुड के लड्डू बनाकर भी इसका युज कर सकते हैं।

जो लोग  काम करके थकजाते है और कमजोरी महसूस होती हो उनको गुड़ को खाने से आपका एनर्जी लेवल बढ़ जाता है। गुड़ जल्दी  पच जाने वाला  आहार है, इससे शुगर का लेवल भी नहीं बढ़ता. दिनभर काम करने से आपको थकान लगे तो तुरंत गुड़ खाले

 गुड़ शरीर के तापमान को कंट्रोल रखता है। इसमें एंटी एलर्जिक तत्व पाया जाता हैं, इसलिए दमा के मरीज़ खाये तो काफी फायदेमंद होता है।

 रोज़ गुड़ के एक टुकड़े को अदरक के साथ खाया करें, इससे जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिलता ऊ।
 गुड़ के साथ पके चावल खाया जाये तो बैठा हुआ गला ठीक होकर आवाज भी खुल जाती है।

 गुड़ और काले तिल के लड्डू बना कर सर्दियों मेंखाने से स्वास अस्थमा की शिकायत नहीं होती है।

 सीनेमे कफ जम गये हो तो गुड़ को पिघलाकर उसकी पपड़ी बनाकर खाएं।

 गुड़ में घी डालकर खाने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

 खाना खाकर गुड़ खा लेने से पेट में गैस नहीं बनती.

 जीन लोगोको पीलिया होगया हो उनको पांच ग्राम सौंठ को दस ग्राम गुड़ के साथ खाने से पीलिया रोग में फायदा होता है।

गुड़ का हलवा बना कर खाने से दीमाग तेज होकर याद शक्ति  को बढाता है।

 गुड़ और सरसों का तेल दोनुंको समान मात्रा(5-5 ग्राम) लेकर दोनों को मिलाकर खानेसे श्वास(अस्थमा) रोग से छुटकारा मिलता है।


Sunday, April 26, 2020

अंकुरित मूंग का सलाद कैसे बनाएं जाने बनानेका पुरा तरीका हिंदी में



अंकुरित मूंग का सलाद कैसे बनाएं

अंकुरित मूंग का सलाद बनाना बहुत ही आसान है और यह स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है। ये सलाद बिना पकी मूंग से बनाए जाते हैं, और उन लोगों के लिए अधिक फायदेमंद होते हैं जीनको समयकम होता हैं। विशेष रूप से जिनके पास खाना पकाने के लिए पर्याप्त समय नहीं है, और पूरी तरह से खाना बनाना नहीं जानते हैं। यह नुस्खा उन लोगों के लिए है जो घर से दूर, कभी-कभी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करते हैं

तो तैयार हो जाइए और इस रेसिपी को बनाना सीखिए।

मूंग को अंकुरित  यानी उगाने के लिए, सबसे पहले मूंग को साफ करें और मुंग को धो कर 6 से 8 घंटे के लिए पानी में भिगो दें। मूंग को फिर से धो लें और पानी को छान लें। उसके बाद, इसे एक सूती कपड़े में लपेटें और इसे 10-12 घंटे (मौसम के आधार पर) या जब तक आप उगेहुये देखना शुरू नहीं करते हैं तब तक लटकाएं। जब कपड़ा सुख जाए, तो पानी फिरसे छिड़के। जब अंकुरित होजाये, तो खाने के लिए तैयार हैं। अंकुरित मूंग एक जीवित भोजन है। यदि आप अंकुरित मूंग को फ्रिज में रखते हैं, तो भी वे बढ़ते रहेंगे और  विटामिन की मात्रा भी बढ़ेंगी । यह खाने में पौष्टिक्ता बढ़ाता है और, खाने में पकवान में हल्कापन और मिठास लाता है।

संग्रह के तरीके

2 दिनों के अंदर अंकुरित मूंग का उपयोग करें क्योंकि वह जल्दी खराब होजाते है और उपयोग करने से पहले उन्हें धो लें।
 अंकुरित मूंग जल्दी खराब हो जाते हैं, इसलिए खाने से पहले उन्हें धोना जरूरी है।
स्वास्थ्य संबंधी
 अंकुरित मूंग विटामिन, खनिज, प्रोटीन और एंजाइम का एक बेहतरीन स्रोत है।
 अंकुरित मूंग पचाने में आसान होती है। यह बड़ी मात्रा में एंजाइमों को पचाने में आसान बनाता है।

सामग्री (2-3 लोगों के लिए)

1 कप अंकुरित मूंग
1/4 चोथाइ कप बारीक कटी शिमला मिर्च
1 बड़ा चम्मच बारीक कटा प्याज
1 बड़ा चम्मच बारीक कटा हरा धनिया
गार्निश करने के लिए
1 चम्मच बारीक कटा हुआ लहसुन
1 चम्मच तेल
1 चम्मच सोया सॉस
2 चम्मच सफेद सिरका
1/2 आधा चम्मच चीनी
आधी चमच कुचली हुइ लाल मिर्च
 भुनी हुए मूंग 2 बड़े चम्मच पीसकर
काला नमक स्वाद के अनुसार

तरीका

एक कड़ाही में तेल डालकर गरम करें, तेल में लहसुन डालकर सुनहरा होने तक भूनें, फिर गैस बंद कर दें और इसे ठंडा होने दें।
अब इसमें भुना हुआ लहसुन, सोया सॉस, सफेद सिरका, चीनी, काली मिर्च, नमक और मूंग डालें और अच्छी तरह से मिलाएँ।
अब एक बरतन में अंकुरित मूंग और शिमला मिर्च मिलाएं, पहले से तैयार गार्निश मिक्स को अच्छी से मिलाएं, ऊपर से हरी धनिया और हरे प्याज डालकर खाये या फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें। और खानेके टाइम नींबू नीचोड कर खाये

Thursday, April 16, 2020

Android और iPhone में Whatsapp ग्रुप कॉल कैसे करें ? जाने आसान तरीका


Android और iPhone में Whatsapp  ग्रुप कॉल कैसे करें ? जाने आसान तरीका 

व्हाट्सएप दोस्तों और परिवार के साथ चैट करने का सबसे लोकप्रिय तरीका है। लेकिन यह ऐप सिर्फ चैटिंग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आपको अपने प्रियजनों से वर्चुअल तरीके से कॉल का मौका देता है, जिसे वीडियो कॉलिंग कहा जाता है। अगर आप वीडियो कॉल नहीं करना चाहते हैं तो इस  App पर वॉयस कॉलिंग फीचर भी आपके लिए उपलब्ध है। यह केवल एक व्यक्ति से नहीं बल्कि आप व्हाट्सएप कॉलिंग के माध्यम से एक बार में बहुत से लोगों के साथ वीडियो चैट का आनंद ले सकते हैं। Whatsapp का ग्रुप कॉलिंग फीचर तमाम प्लेटफॉर्म पर मौजूद है, चाहे आप एंड्रायड इस्तेमाल करते हों या आईफोन इस्तेमाल करते हों।


WhatsApp का ग्रुप कॉलिंग फीचर 2018 में लॉन्च किया गया था। ये सुविधा उन लोगों के लिए उपयोगी है जो एक ही समय में कई लोगों के साथ वीडियो कॉल करना चाहते हैं और zoom  या google Duo जैसे अन्य ग्रुप कॉलिंग ऐप को समजना नही चाहते हैं। ऐसे लोगों के लिए व्हाट्सएप ग्रुप कॉल एक अच्छा विकल्प है। यदि आप भी इस सुविधा का आनंद लेना चाहते हैं, लेकिन इसका उपयोग करना नहीं जानते हैं, तो आज हम आपकी इस दुविधा को ठीक करने जा रहे हैं।

आज हम आपको व्हाट्सएप ग्रुप कॉल करने का तरीका बताएंगे। हालाँकि, Android और  iPhone उपयोगकर्ताओं के लिए यह तरीका अलग है। हम आपको दोनों तरीके बताने जा रहे हैं। तो आइये जानते हैं वो तरीका


एंड्रॉइड पर व्हाट्सएप ग्रुप कॉल कैसे करें

1. पहले ओपन करे व्हाट्सएप ऐप।
2. अब व्हाट्सएप पर चैट, स्टेटस और कॉल बार से 'कॉल' चुनें।
3 कॉल का चयन करने के बाद, आप उस लीस्ट को देखेंगे, जिसे आपने आजतक व्हाट्सएप पर कॉल किये है।
4 अब  आपको 'न्यू ग्रुप' कॉल बटन पर क्लिक करना है।
5 अब आपको व्हाट्सएप ग्रुप कॉल करने के लिए जितने भी कॉन्टैक्ट्स चुनने हैं, उन्हें चुनना होगा। याद रखें कि आप केवल तीन लोगों के ग्रुप को चुन सकते हैं।
6.चुनेहुये  Contact अब सर्कल सूची में सबसे ऊपर होगे।
7.  आपको यहां चुनना होगा के आप वीडियो कॉल करना चाहते हैं या वॉइस कॉल करना चाहते हैं।

यदि आपको कॉल के दौरान कोई अन्य कॉल सदस्य बनाने की आवश्यकता है, तो आप उन्हें संपर्क आइकन पर क्लिक करके भी जोड़ सकते हैं। याद रखें कि चार से अधिक सदस्य कॉल में शामिल नहीं हो सकते हैं।


कैसे करें व्हाट्सएप ग्रुप को iPhone पर कॉल

1. सबसे पहले अपने आईफोन में व्हाट्सएप खोलें।
2. अब व्हाट्सएप के निचले हिस्से में जाएं और स्टेटस, कॉल, कैमरा और चैट बार से 'कॉल' चुनें।
3. कॉल का चयन करने के बाद, आप उस सूची को देखेंगे, जिसे आपने आज व्हाट्सएप पर कॉल किया है।
4.  अब बस आपको 'न्यू ग्रुप' कॉल बटन पर क्लिक करना है।
5. अब आपको वह लिस्ट दिखाएगा जहां से ग्रुप कॉल के लिए Contact का चयन करना है। आईफोन में एंड्रॉइड की तरह, आप केवल समूह कॉल के लिए तीन लोगों का चयन कर सकते हैं।
6. अब यह चुनना है कि आप वीडियो कॉल करना चाहते हैं या वॉइस कॉल करना चाहते हैं। वॉइस कॉल के लिए, आपको फोन बटन पर क्लिक करना होगा, जबकि वीडियो कॉल के लिए वीडियो कैमरा बटन।

आईफोन पर भी, यदि आप कॉल के दौरान किसी अन्य सदस्य को कॉल का हिस्सा बनाना चाहते हैं, तो आप उन्हें Contact आइकन पर क्लिक करके भी जोड़ सकते हैं। याद रखें कि चार से अधिक व्यक्ति कॉल में शामिल नहीं हो सकते हैं।


इसके अलावा, आप ग्रुप को सीधे अपने Android और iPhone पर भी कॉल कर सकते हैं। आप जानेकि कैसे करे

1. पहले व्हाट्सएप ऐप खोले।
2. अब उस ग्रुप को चुनें जिसे आप कॉल करना चाहते हैं।
3. अब व्हाट्सएप कॉल बटन पर क्लिक करें।
 4. अब सबसे नीचे आपको एक पॉपअप स्क्रीन दिखाई देगी, यहां आपको उन कॉन्टेक्ट्स को चुनना होगा जिन्हें आप कॉल करना चाहते हैं। आप केवल तीन लोगों का चुन सकते हैं।
5. अब आपको वीडियो और वॉयस कॉल सेलेक्ट करना है। फिर आप इन तीन सदस्यों के साथ वीडियो या वॉयस कॉल का आनंद ले सकते हैं।
       तो आपको  इस पोस्ट से whatsapp पे ग्रुप कोल करना समज मे आगया होगा।

Tuesday, April 14, 2020

अंकुरित मूंग की दाल खाने के के बडे फायदे



अंकुरित मूंग की दाल के फायदे


    मूंग की दाल आप सब ने किसी न किसी तरह में ज़रूर खाया होगा। मूंग  दाल की कई रेसपी जैसे मूंग की दाल, मूंग सैंडविच, अंकुरित मूंग की दाल सलाड, मूंग दाल की खिचड़ी, बरिया, लड्डू और मूंग दाल का हलवा आदि को आप सभी ने ज़रूर खाया होगा। मूंग की दाल का इस्तेमाल सिर्फ वानगी बनाने के लिए नहीं बल्कि वज़न घटाने के लिए भी लोग इसका इस्तेमाल करते है क्योंकि अंकुरित मूंग की दाल के खानेसे शरीर को 30 ग्राम कैलरी और 1 ग्राम फ़ैट ही मीलता है।

        अंकुरित मूंग दाल में आयरन,प्रोटीन, मैग्‍नीशियम, विटामिन सी, विटामिन बी,विटामिन  बी -6,कैल्शियम,पौटेशियम, कॉपर, फ़ाइबर, फ़ास्फ़ोरस,नियासिन,फ़ोलेट,राइबोफ्लेविन,थायमिन आदि मौजूद होते है  इसलिए इसका खाना स्वास्थ्य के लीये भी बेहद फायदेमंद है।
फ़ायदेमंद अंकुरित मूंग की दाल :

पोषक तत्वों से भरपूर :-

     पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित भोजन और उचित पोषक तत्वों को पाने के लिए दररोज अंकुरित मूंग की दाल का सेवन  जरूर करें क्योंकि यह शरीर में जरुरी तत्‍वों की कमी को पूरा करके शरीर को ताकतवर बनाता है।  अंकुरित मूंग दाल में विटामिन सी, आयरन तथा फ़ास्फ़ोरस की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। इतना ही नहीं मूंग की दाल अंकुरित के बाद अलग अलग दालों में मिलने वाला स्टार्च, ग्लूकोज़ में तथा फ्राक्टोज़, माल्टोज़ में बदल जाता है। इससे इनका टेस्ट तो बढ़ता ही है साथ ही वे हजम भी हो जाता हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं:-

    शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने और बीमारियों से लड़ने के लिए  मूंग की दाल का इस्तेमाल करें। ये शरीर को ताक़त देता हैं। उसमें मौजूद एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफ़्लामेट्री गुण शरीर को रोगुं से लड़ने की (इम्‍यूनिटी पॉवर) छमता को बढ़ाता हैं।

कब्‍ज़ में राहत:-

   अंकुरित मूंग की दाल में फ़ाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है। जो पाचन शक्ति को ठीक कर कब्ज़ से छुटकारा दिलाती है।

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करें:-

    अंकुरित मूंग की दाल में मौजूद पेप्टिसाइड बीपी को कंट्रोल और शरीर को फ़िट रखती है जिससे आप स्वस्थ और एक्टिव बने रहते है।

आयरन का अच्छा स्रोत:-

     मूंग की दाल आयरन का एक भरपूर स्रोत है। खुन की कमी से बचने के लिए ओर आयरन की कमी को दूर करने के लिए मूंग की दाल का जीयादा सेवन करें।

वज़न घटाने में मददगार:-

    अगर मोटापे से परेशान है और वज़न कम करना चाहते है तो अंकुरित मूंग की दाल खाया करें क्योंकि ये न सिर्फ़ आपकी कैलोरी कम करती है बल्कि आपको लंबे टाइम तक भूख भी नहीं लगती। इसीलिए रात के खाने में आप रोटी के साथ एक कटोरी मूंग दाल खाएं जिससे आपको भरपूर पोषण भी मिलेगा।
मूंग दाल के लाभ :

कब्ज़:-

       अगर आपको कब्ज़ होगयाहो तो मूंग की दाल की खिचड़ी बनाकर खाएं क्योंकि मूंग दाल की खिचड़ी सेवन करने से कब्ज दूर हो जाता है। किसी भी बीमारी के पश्चात शरीर बहुत कमज़ोर हो जाता है।तो इस कमजोर शरीर को मजबुत बनाने के लिए नियमित मूंग की दाल का उपयोग करें।

दाद, खाज-खुजली:-

      अगर आप दाद, खाज-खुजली की बीमारी से तकलीफ मे है तो मूंग की दाल को छिलके के साथ पीस कर पेस्ट बनाये फीर इस पेस्ट को तकलीफ की जगह पर लगा लें इससे बेहद आराम मिलेगा।

त्वचा एवं बाल :-

    अंकुरित मूंग की दाल आपकी त्वचा से लेकर आपके बालों को निखारने में मदद करती हैं। अगर आप बाल झड़ने की तकलीफ से परेशान हैं तो आप अंकुरित दाल की एक कटोरी रोज़ सुबह नाश्‍ते में लें। ऐसा करने से आपके बालों को पोषण मिलेगा।

तो आज से ही अंकुरित मूंग की दाल का रोजाना सेवन करें और खुन की कमी , कमजोर हडि्डयों, मानसिक तनाव, कब्ज़, नींद न आना , बवासीर, मोटापा तथा पेट के कई अन्य रोगों से छुटकारा मिलता है।

Saturday, April 11, 2020

सिरदर्द हो तो अपनाएं ये घरेलू इलाज, तत्काल होगा फायदा Headache




सिर दर्द से छुटकारा पाने के लिए इन उपायों को आजमाएं
सिरदर्द वास्तव में नर्वस सिस्टम और गर्दन से जुड़ी समस्या है। सिरदर्द के साथ सुबह उठने का मतलब है पूरा दिन बर्बाद करना। सिरदर्द एक बहुत ही आम समस्या है लेकिन कभी-कभी यह इतनी तेज़ होती है कि इसका सामना करना मुश्किल होता है। हालांकि बाजार में कई तरह की दवाएं उपलब्ध हैं, जो सिरदर्द से राहत दिला सकती हैं। लेकिन हर बार दवाई लेना ठीक नहीं है। शरीर में अत्यधिक नमक का सेवन अन्य बीमारियों को जन्म दे सकता है। लेकिन अगर आप चाहें तो कई घरेलू उपचार हैं जिनसे आप अपने सिर दर्द से राहत पा सकते हैं। ये उपाय इतने आसान हैं कि आप अपने कार्यालय में काम करते हुए इन्हें आज़मा सकते हैं। लेकिन उनमें से एक चीज जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह है अपने दिमाग से किसी भी बुरे विचार को निकालना और शांत रहने की कोशिश करना। इन घरेलू उपचारों के बारे में अच्छी बात यह है कि वे पूरी तरह से सुरक्षित और असरदार हैं।
1. एक्यूप्रेशर द्वारा
सालों से लोग सिर दर्द से राहत पाने के लिए एक्यूप्रेशर का इस्तेमाल कर रहे हैं। सिरदर्द की स्थिति में, अपनी हथेलियों को ऊपर ले आएं। फिर, दूसरे हाथ के अंगूठे और इंडेक्स फिंगर के बीच के स्थान पर एक हाथ से धीरे से मालिश करें। इस प्रक्रिया को दोनों हाथों में दो से चार मिनट तक दोहराएं। ऐसा करने से आपको सिरदर्द से राहत मिलेगी।
2. पानी से
थोड़ी मात्रा में पानी पीने से भी सिरदर्द से राहत मिलती है। एक बार जब आपका शरीर हाइड्रेटेड हो जाएगा, तो सिरदर्द कम होना शुरू हो जाएगा।
3. लौंग के माध्यम से
एक तवे पर पांच छेह लौंग को गर्म करें। इन गर्म लौंग को रूमाल में बांधें। इस पोटली को कुछ देर तक सूंघते रहें। आप देखेंगे कि सिरदर्द कम हो गया है।
4. तुलसी के पते से
जब आपको सिरदर्द होता है तो आपने अक्सर लोगों को चाय या कॉफी पीते देखा होगा। तुलसी के पत्तों को पानी में पकाने के बाद खाएं। यह किसी भी चाय और कॉफी की तुलना में अधिक कारगर और फायदेमंद है। 5. सेब में नमक डालें
यदि बहुत प्रयास के बाद भी आपको सिरदर्द दुर नहीं हो रहा है, तो एक सेब काट लें और उसमें नमक डालें। सिर दर्द से राहत पाने के लिए यह एक बहुत ही असरकारक उपाय है।
6. काली मिर्च और पुदीने की चाय
सिर दर्द के लिए काली मिर्च और पुदीने की चाय पीना भी बहुत फायदेमंद होता है। आप चाहें तो काली चाय में कुछ पुदीने की पत्तियां भी डाल सकते हैं।

Friday, April 10, 2020

तब्लीगी जमात की शुरुआत कब कहां से कीस्ने स्थापना की


तब्लीगी जमात की शुरुआत सं. इ. 1926 में हरियाणा के मेवात से हुई थी। मेवात के क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुसलमान रहते थे, जो देर से मध्य युग में इस्लाम कबूल किया था
वो अर्ध-मुस्लिम और अर्ध-हिंदू कलचर में जिंदगी गुजार रहते थे। इस समय के दौरान क्षेत्र में तेज आंदोलन शुरू हुआ, जिसका मकसद मुसलमानों को हिंदू बनाना था, जबकि उसी समय अंग्रेजो ने मुसलमानों को ईसाई धर्म में दाखिल करनेकी कोशिश शुरू कर दी थी। इन प्रयासों के साथ, कुछ मुसलमानों ने धर्म छोडने का मार्ग भी अपनाया था ।  तब्लीगी जमात के संस्थापक मौलाना इलियास (र) ने मुसलमानों के इमान के खतरे को महसूस किया और मदरसा मझाहीरुल उलुम सहारनपुर में अपनी शिक्षण नौकरी छोड़ दी और मुसलमानों को सुधारने की शुरुआत करदी। वो मेवात के मुसलमानों को सुधारने में मशगूल होगये।

यह भी पडे:-
        हज्जाज बिन यूसुफ की दर्दनाक मौत की कहानी


इस जमात ने अद्भुत तरीके पर अच्छे काम किये है। उन्होंने इस्लाम से दूर  मुसलमानों को एक धार्मिक स्वभाव दिया है और उन्हें सुधारने का काम किया है। तब्लीगी जमात पुरी दुनिया में सीधे रास्ते से भटके मुसलमानों को सही दीन की शिक्षाओं पर अमल करने की तबलीग करती है। पाकिस्तान सहित दुनिया भर में इस तबलीगी जमात के काम से प्रभावित होने वाले जमातीयुं की संख्या गीनना आसान नहीं है, उनमें से बड़ी संख्या में शोबिज़, खिलाड़ी , व्यवसायी , राजनीति सहित अन्य क्षेत्रों से ताल्लुक रखने वाले मशहूर व्यक्तियों की  एक  बड़ी संख्या भी हैं। तबलीगी जमात कीसी नई विचारधारा या नए मकसद का प्रचारक नहीं है, बल्कि केवल खुद और अपने मुस्लिम भलाई के लिए कड़ी मेहनत और कुर्बानी की दावत देती है। इसीलिए, अन्य संगठनों और संघों की तरह, इस आंदोलन का कोई कानून या घोषणा पत्र नहीं है। कोई कार्यालय या रजिस्ट्रार नहीं है और न ही कोई सदस्य या अधिकारी हैं । यहां तक कि उसे एक अनोखा नाम भी नहीं दिया गया था। इस तबलीगी जमात के संस्थापक मौलाना इलियास कहते थे कि हमने इस "तब्लीगी जमात" का नाम नहीं लिया है। हम सिर्फ काम करना चाहते थे, इसे नाम देना भी जरूरी नहीं समझते थे। लोगों ने तबलीगी जमात कहना शुरू कर दिया, फिर यह इतना लोकप्रिय हो गया कि हमने इसे खुद कहना शुरू कर दिया। "
आज, तब्लीगी जमात अपनी नुमाया विशेषताओं और अलग गुणों के कारण दुनिया भर में जानी और पहचानी जाती है। तबलीग का काम दुनिया के 200 से अधिक देशों में किया जा रहा है। दुनिया भर में 30 मीलीयन से अधिक लोग इससे जुड़े हैं। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश इसके प्रमुख केंद्र हैं। इस जामात का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। कोई फंडिंग और डोनेशन सिस्टम नहीं। कोई प्रसारण विभाग नहीं। अखबारों और टेलीविजन के प्रशंसक बनने में उनका कोई शोख नहीं है। उसके खिलाफ दुनिया के किसी भी पुलिस स्टेशन में कोई एफआईआर दर्ज नहीं है। ये जमात किसी भी प्रकार की हिंसा और गलत गतिविधियों में शामिल नहीं होता है। दुनिया भर के किसी भी देश ने उन पर कभी भी हिंसक वारदातों का आरोप नहीं लगाया। ये जमात देश के कानूनों को ध्यान में रखकर अपने कार्य करती है। यह जमात उन लोगों को भी जवाब नहीं देता जो उनके खिलाफ बोलते हैं। वे प्रेम से आमंत्रित करते हैं और प्रचार करते हैं। सादगी और मानवतावाद इसके स्वभाव में है।
यह पूरी तरह से गैर-राजनीतिक और कानून का पालन करने वाली जमात है। तबलीगी जमात पर प्रतिबंध लगाने के लिए बार-बार प्रयास किए गए, लेकिन विचार  धारकों के पास ऐसा कोई मोका नहीं मीलसका। उन्होंने तबलीगी जमात के तरीके और  उनके नीसाब में ऐसा कोइ पॉइंट उन्हें नहीं देखा जो इसे बहाना बनाकर  उन पर पाबंदियां लगा देते। इस जमात की इतिहास में कोई मिसाल नहीं है कि इसने सरकार के साथ टकराव की कोशिश की है और न ही कभी आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है। यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण आंदोलन है और हमेशा हिंसा का विरोध किया गया है।
      ऐसा कोई मामला नहीं है जहां इस जमात ने कभी कानून का उल्लंघन किया हो या इस व्यवहार से किसी धर्म या जाती को नुकसान पहुंचाया गया हो। लेकिन वायरस मीडिया ये कह रहा है कि दुनिया अब यह महसूस कर रही है कि यह भारतीय वायरस मीडिया केवल हिंदू मुस्लिमों के बीच नफरत फैलाने की कोशिश कर रही है कि यह वायरस मीडिया कभी भी सभी भारतीय मुसलमानों को एकसाथ खुले तौर पर टारगेट नहीं किया गया है। बल्कि, यह अलग अलग रूप से मुस्लिम समुदाय को टार्गेट कर रहा है और मुस्लिम समाज को कमजोर कर रहा है। लेकिन इस बार सभी मस्लक और सभी मुसलमानों ने महसूस किया है कि आज उनकी बारी है तो कल हमारी बारी होगी। जबकि तब्लीगी जमात संप्रदायवाद को खत्म करने के लिए अपने घोषणा पत्र में शामील है। ये लोग सभी मस्लकों की मस्जिदों में जाते हैं। सभी फीरकुंं के लोगों से मिलना और सभी मुस्लिम लोगों को एहसास दीलाते हैं कि जब तक हम पैगंबर साहब के रोशन उसूलों का पालन नहीं करेंगे, तब तक दुनिया हमसब  को अपमानित करती रहेगी। अगर ऐसा कहा जाता, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि तब्लीगी जमात मुस्लिम समुदाय की एकता और मुस्लिम उम्मत की एकता के लिए एक बड़ा प्लेटफार्म है, जिस पर सभी मसालीक और फीरकुं के लोग अपने-अपने मसालीक के मफादात को पीछे डालकर  केवल सच्चे मुसलमान बननकी कोशिश करें  तो बहुत जल्द ही फीरकावारीयत समाप्त हो सकती है।
 इंसानों का बनाया हुआ कोई भी नीझाम पूरे तौर पर खामी रहित नहीं होता।  जरूर कोई न कोई खामी रह जाती है चाहे कोई भी काम कितना भी ईमानदारी से क्यों न हो। खामियां किसी में भी हो उन्हें मौके पर ही हटाया जा सकता है, और समय के साथ-साथ इंसान खामीयुं को सुधारना और दूर करना जारी रखता है।  तब्लीगी जमात का नीझाम भी लोगों की भलाई के लिए ईमानदारी के साथ बनाया गया एक नीझाम है, जिसमें निश्चित रूप से कई खामियां होंगी, लेकिन इसकी कुच कमियों के कारण पूरे के पूरे रूप में इसकी सेवाओं को खारिज नहीं किया जा सकता है। ऐसे लोगों पर आश्चर्य होता है जो किसीकी एक खामी की वजासे उस्की नींनानवे(99) खुबीयुं पर पानी फेर देते हैं । विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब यह धार्मिक मामलों की बात आती है तो और भी संघीन होजाता है क्योंकि  के मजहब के नाम पर काम करने वाली  तमाम मसलक और फिरकुं की जमातुं और व्यक्तियों को एक दूसरे की धार्मिक सेवाओं की सराहना करनी चाहिए। किसी भी मस्लक के लोग धर्म के लिए बेहतर तरीके से काम कर रहे हो, बजाय उस पर उंगली उठाने के, उन्हें सहयोग करना चाहिए, ताकि वे बेहतर काम कर सकें, लेकिन दुख की बात है कि सभी मुसलमान अधिक से अधिक लोगों को हमारे मस्लक में लाने की कोशिश में लगे हुए हैं, लेकिन किसी को परवाह नहीं है कि अधिक से अधिक लोग इस्लाम में कैसे प्रवेश करे और जो पहले से ही इस्लाम में दाखिल हो चुके हैं, वे पूरी तरह से इस्लाम के रोशन सिद्धांतों पर काम करनेवाले बनजाये

9/11 के  बाद की तारीख हमारे सामने हैं
 इस्लाम से नफरत करने वाले पागलों ने इस्लाम को बदनाम करने के लिए क्या कुछ नहीं किया नतीजा उसका उल्टा निकला इसलाम उन लोगों तक भी पहुंचा जिन तक खुदा का पैगाम मुसलमानों के लिए पहुंचाना इतना आसान न था और लोग इस्लाम में दाखिल होते गए
 बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस्लाम मजहब  दुनिया में सबसे ज्यादा फेलने वाला मजहब है और आइंदा चलकर ईसाइयत को पीछे छोड़कर दुनिया भर में इस्लाम को मानने वालों की  तादाद सबसे ज्यादा हो जाएगी
 तबलीगी जमात की पहचान   दुनिया भर में मुसलमानों के दरमियान तो है लेकिन जिस तरह से तबलीगी जमात मुसलमानों के दरमियान पहचानी हुई है लेकिन दूसरे मजहब के मानने वालों के दरमियान पहचानी हुई नहीं है
 मीडिया इस जमात  की पहचान कराते हुए उन  हजरात के काम की  पहचान भी करा रहा है
 तबलीग वालों के लिए यह एक बेहतरीन मौका है के जिस प्यारो मोहब्बत का बर्ताव वह मुसलमानों के दरमियान करते हैं
 वह थोड़ा सा रुख आइंदा चलकर हिंदुस्तान के इस दबे कुचले  गैर मुस्लिमों के तबके की तरफ भी कर दे जिसे हमेशा से सताया गया है तो यकीन जाने पूरे हिंदुस्तान के अंदर एक इंकीलाब बरपा कर देगा न सिर्फ नफरत की दीवारें जमीन बोस होगी बल्कि मोहब्बत के साथ देश आगे बढ़ेगा। 
 बहुत मुमकिन है के तबलीगी लोग पहले से उसकी  तैयारियां  भी  कर रहे हो
 अल्लाह इस जमात का  हिमायत करने वाला  मदद करने वाला हो।