Friday, April 10, 2020

तब्लीगी जमात की शुरुआत कब कहां से कीस्ने स्थापना की


तब्लीगी जमात की शुरुआत सं. इ. 1926 में हरियाणा के मेवात से हुई थी। मेवात के क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुसलमान रहते थे, जो देर से मध्य युग में इस्लाम कबूल किया था
वो अर्ध-मुस्लिम और अर्ध-हिंदू कलचर में जिंदगी गुजार रहते थे। इस समय के दौरान क्षेत्र में तेज आंदोलन शुरू हुआ, जिसका मकसद मुसलमानों को हिंदू बनाना था, जबकि उसी समय अंग्रेजो ने मुसलमानों को ईसाई धर्म में दाखिल करनेकी कोशिश शुरू कर दी थी। इन प्रयासों के साथ, कुछ मुसलमानों ने धर्म छोडने का मार्ग भी अपनाया था ।  तब्लीगी जमात के संस्थापक मौलाना इलियास (र) ने मुसलमानों के इमान के खतरे को महसूस किया और मदरसा मझाहीरुल उलुम सहारनपुर में अपनी शिक्षण नौकरी छोड़ दी और मुसलमानों को सुधारने की शुरुआत करदी। वो मेवात के मुसलमानों को सुधारने में मशगूल होगये।

यह भी पडे:-
        हज्जाज बिन यूसुफ की दर्दनाक मौत की कहानी


इस जमात ने अद्भुत तरीके पर अच्छे काम किये है। उन्होंने इस्लाम से दूर  मुसलमानों को एक धार्मिक स्वभाव दिया है और उन्हें सुधारने का काम किया है। तब्लीगी जमात पुरी दुनिया में सीधे रास्ते से भटके मुसलमानों को सही दीन की शिक्षाओं पर अमल करने की तबलीग करती है। पाकिस्तान सहित दुनिया भर में इस तबलीगी जमात के काम से प्रभावित होने वाले जमातीयुं की संख्या गीनना आसान नहीं है, उनमें से बड़ी संख्या में शोबिज़, खिलाड़ी , व्यवसायी , राजनीति सहित अन्य क्षेत्रों से ताल्लुक रखने वाले मशहूर व्यक्तियों की  एक  बड़ी संख्या भी हैं। तबलीगी जमात कीसी नई विचारधारा या नए मकसद का प्रचारक नहीं है, बल्कि केवल खुद और अपने मुस्लिम भलाई के लिए कड़ी मेहनत और कुर्बानी की दावत देती है। इसीलिए, अन्य संगठनों और संघों की तरह, इस आंदोलन का कोई कानून या घोषणा पत्र नहीं है। कोई कार्यालय या रजिस्ट्रार नहीं है और न ही कोई सदस्य या अधिकारी हैं । यहां तक कि उसे एक अनोखा नाम भी नहीं दिया गया था। इस तबलीगी जमात के संस्थापक मौलाना इलियास कहते थे कि हमने इस "तब्लीगी जमात" का नाम नहीं लिया है। हम सिर्फ काम करना चाहते थे, इसे नाम देना भी जरूरी नहीं समझते थे। लोगों ने तबलीगी जमात कहना शुरू कर दिया, फिर यह इतना लोकप्रिय हो गया कि हमने इसे खुद कहना शुरू कर दिया। "
आज, तब्लीगी जमात अपनी नुमाया विशेषताओं और अलग गुणों के कारण दुनिया भर में जानी और पहचानी जाती है। तबलीग का काम दुनिया के 200 से अधिक देशों में किया जा रहा है। दुनिया भर में 30 मीलीयन से अधिक लोग इससे जुड़े हैं। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश इसके प्रमुख केंद्र हैं। इस जामात का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। कोई फंडिंग और डोनेशन सिस्टम नहीं। कोई प्रसारण विभाग नहीं। अखबारों और टेलीविजन के प्रशंसक बनने में उनका कोई शोख नहीं है। उसके खिलाफ दुनिया के किसी भी पुलिस स्टेशन में कोई एफआईआर दर्ज नहीं है। ये जमात किसी भी प्रकार की हिंसा और गलत गतिविधियों में शामिल नहीं होता है। दुनिया भर के किसी भी देश ने उन पर कभी भी हिंसक वारदातों का आरोप नहीं लगाया। ये जमात देश के कानूनों को ध्यान में रखकर अपने कार्य करती है। यह जमात उन लोगों को भी जवाब नहीं देता जो उनके खिलाफ बोलते हैं। वे प्रेम से आमंत्रित करते हैं और प्रचार करते हैं। सादगी और मानवतावाद इसके स्वभाव में है।
यह पूरी तरह से गैर-राजनीतिक और कानून का पालन करने वाली जमात है। तबलीगी जमात पर प्रतिबंध लगाने के लिए बार-बार प्रयास किए गए, लेकिन विचार  धारकों के पास ऐसा कोई मोका नहीं मीलसका। उन्होंने तबलीगी जमात के तरीके और  उनके नीसाब में ऐसा कोइ पॉइंट उन्हें नहीं देखा जो इसे बहाना बनाकर  उन पर पाबंदियां लगा देते। इस जमात की इतिहास में कोई मिसाल नहीं है कि इसने सरकार के साथ टकराव की कोशिश की है और न ही कभी आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है। यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण आंदोलन है और हमेशा हिंसा का विरोध किया गया है।
      ऐसा कोई मामला नहीं है जहां इस जमात ने कभी कानून का उल्लंघन किया हो या इस व्यवहार से किसी धर्म या जाती को नुकसान पहुंचाया गया हो। लेकिन वायरस मीडिया ये कह रहा है कि दुनिया अब यह महसूस कर रही है कि यह भारतीय वायरस मीडिया केवल हिंदू मुस्लिमों के बीच नफरत फैलाने की कोशिश कर रही है कि यह वायरस मीडिया कभी भी सभी भारतीय मुसलमानों को एकसाथ खुले तौर पर टारगेट नहीं किया गया है। बल्कि, यह अलग अलग रूप से मुस्लिम समुदाय को टार्गेट कर रहा है और मुस्लिम समाज को कमजोर कर रहा है। लेकिन इस बार सभी मस्लक और सभी मुसलमानों ने महसूस किया है कि आज उनकी बारी है तो कल हमारी बारी होगी। जबकि तब्लीगी जमात संप्रदायवाद को खत्म करने के लिए अपने घोषणा पत्र में शामील है। ये लोग सभी मस्लकों की मस्जिदों में जाते हैं। सभी फीरकुंं के लोगों से मिलना और सभी मुस्लिम लोगों को एहसास दीलाते हैं कि जब तक हम पैगंबर साहब के रोशन उसूलों का पालन नहीं करेंगे, तब तक दुनिया हमसब  को अपमानित करती रहेगी। अगर ऐसा कहा जाता, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि तब्लीगी जमात मुस्लिम समुदाय की एकता और मुस्लिम उम्मत की एकता के लिए एक बड़ा प्लेटफार्म है, जिस पर सभी मसालीक और फीरकुं के लोग अपने-अपने मसालीक के मफादात को पीछे डालकर  केवल सच्चे मुसलमान बननकी कोशिश करें  तो बहुत जल्द ही फीरकावारीयत समाप्त हो सकती है।
 इंसानों का बनाया हुआ कोई भी नीझाम पूरे तौर पर खामी रहित नहीं होता।  जरूर कोई न कोई खामी रह जाती है चाहे कोई भी काम कितना भी ईमानदारी से क्यों न हो। खामियां किसी में भी हो उन्हें मौके पर ही हटाया जा सकता है, और समय के साथ-साथ इंसान खामीयुं को सुधारना और दूर करना जारी रखता है।  तब्लीगी जमात का नीझाम भी लोगों की भलाई के लिए ईमानदारी के साथ बनाया गया एक नीझाम है, जिसमें निश्चित रूप से कई खामियां होंगी, लेकिन इसकी कुच कमियों के कारण पूरे के पूरे रूप में इसकी सेवाओं को खारिज नहीं किया जा सकता है। ऐसे लोगों पर आश्चर्य होता है जो किसीकी एक खामी की वजासे उस्की नींनानवे(99) खुबीयुं पर पानी फेर देते हैं । विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब यह धार्मिक मामलों की बात आती है तो और भी संघीन होजाता है क्योंकि  के मजहब के नाम पर काम करने वाली  तमाम मसलक और फिरकुं की जमातुं और व्यक्तियों को एक दूसरे की धार्मिक सेवाओं की सराहना करनी चाहिए। किसी भी मस्लक के लोग धर्म के लिए बेहतर तरीके से काम कर रहे हो, बजाय उस पर उंगली उठाने के, उन्हें सहयोग करना चाहिए, ताकि वे बेहतर काम कर सकें, लेकिन दुख की बात है कि सभी मुसलमान अधिक से अधिक लोगों को हमारे मस्लक में लाने की कोशिश में लगे हुए हैं, लेकिन किसी को परवाह नहीं है कि अधिक से अधिक लोग इस्लाम में कैसे प्रवेश करे और जो पहले से ही इस्लाम में दाखिल हो चुके हैं, वे पूरी तरह से इस्लाम के रोशन सिद्धांतों पर काम करनेवाले बनजाये

9/11 के  बाद की तारीख हमारे सामने हैं
 इस्लाम से नफरत करने वाले पागलों ने इस्लाम को बदनाम करने के लिए क्या कुछ नहीं किया नतीजा उसका उल्टा निकला इसलाम उन लोगों तक भी पहुंचा जिन तक खुदा का पैगाम मुसलमानों के लिए पहुंचाना इतना आसान न था और लोग इस्लाम में दाखिल होते गए
 बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस्लाम मजहब  दुनिया में सबसे ज्यादा फेलने वाला मजहब है और आइंदा चलकर ईसाइयत को पीछे छोड़कर दुनिया भर में इस्लाम को मानने वालों की  तादाद सबसे ज्यादा हो जाएगी
 तबलीगी जमात की पहचान   दुनिया भर में मुसलमानों के दरमियान तो है लेकिन जिस तरह से तबलीगी जमात मुसलमानों के दरमियान पहचानी हुई है लेकिन दूसरे मजहब के मानने वालों के दरमियान पहचानी हुई नहीं है
 मीडिया इस जमात  की पहचान कराते हुए उन  हजरात के काम की  पहचान भी करा रहा है
 तबलीग वालों के लिए यह एक बेहतरीन मौका है के जिस प्यारो मोहब्बत का बर्ताव वह मुसलमानों के दरमियान करते हैं
 वह थोड़ा सा रुख आइंदा चलकर हिंदुस्तान के इस दबे कुचले  गैर मुस्लिमों के तबके की तरफ भी कर दे जिसे हमेशा से सताया गया है तो यकीन जाने पूरे हिंदुस्तान के अंदर एक इंकीलाब बरपा कर देगा न सिर्फ नफरत की दीवारें जमीन बोस होगी बल्कि मोहब्बत के साथ देश आगे बढ़ेगा। 
 बहुत मुमकिन है के तबलीगी लोग पहले से उसकी  तैयारियां  भी  कर रहे हो
 अल्लाह इस जमात का  हिमायत करने वाला  मदद करने वाला हो। 
Share This
Previous Post
Next Post

Friends, if you want to know about the country and the world, as you want to know and read Islamic Knowledge, Articles, True Stories, Health Tips, General Knowledge, and more, then you have come to the right website

0 Please Share a Your Opinion.:

Please Do not enter any spam link in the Comment box